कविता: प्रभु राम (वाल्मीकि रामायण के संदर्भ में)
🙂वन में भी जो राज दिखे,
ऐसे थे श्रीराम,
त्याग, तपस्या, सत्य की मूर्ति,
जग में जिनका नाम।🙂
😍अयोध्या के राजकुमार थे,
पर मन से थे साधु,
पिता के वचन निभाने को,
वन को किया उन्होंने स्वीकार।😍
😭सीता संग और लक्ष्मण साथ,
धर्म का पथ अपनाया,
कठिनाई में भी धैर्य रखकर,
जीवन को आदर्श बनाया।😭
✊वन-वन भटके, कष्ट सहे,
पर कभी न हिम्मत हारी,
राक्षसों का नाश किया,
धरती से पीड़ा उतारी।✊
👍सुग्रीव से मित्रता की,
हनुमान को अपनाया,
सागर लांघ कर लंका पहुँचे,
सत्य का ध्वज फहराया।👍
😃रावण जैसे अहंकारी को,
धर्म से हराया,
अधर्म पर विजय पाकर,
सत्य का दीप जलाया।😃
💔वापस लौटे जब अयोध्या,
दीपों से सजी थी नगरी,
हर दिल में बस गए राम,
हर आँख में थी खुशी।❤️
🌄राम केवल एक नाम नहीं,
जीवन का है आधार,
मर्यादा, प्रेम और त्याग से,
बनता है सच्चा इंसान।🌄
🙏हे राम! हमें भी सिखा दो,
सत्य का मार्ग अपनाना,
हर परिस्थिति में धर्म निभाकर,
जीवन को सफल बनाना।👍