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पहले थेलिसिमिया का ज्ञान फिर शादी और संतान

विरासत में मिला दर्द: अज्ञानता की भारी कीमत
​"एक ऐसी बीमारी जो माँ-बाप अपने बच्चे को विरासत में तोहफे के रूप में देते हैं—अनजाने में, अज्ञानता में।"
​मासूमियत का संघर्ष
​छह महीने का आरव जब मुस्कुराता, तो घर में खुशियों की लहर दौड़ जाती। लेकिन धीरे-धीरे उसकी मुस्कान फीकी पड़ने लगी। चेहरा पीला, आँखों में थकान और खेलने की उम्र में बेतहाशा रोना। जब डॉक्टर ने रिपोर्ट देखी, तो माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। आरव थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित था।
​अब आरव का बचपन खिलौनों से नहीं, बल्कि अस्पतालों की सुइयों और हर 15 दिन में चढ़ने वाली खून की बोतलों के बीच सिमट गया है। उसके माता-पिता आज खुद को अपराधी मानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या सारा दोष सिर्फ उनका है?
​लापरवाही का चक्रव्यूह
​जब आरव की माँ गर्भवती थी, वह नियमित चेकअप के लिए डॉक्टर के पास गई। डॉक्टर ने दर्जनों टेस्ट लिखे, हजारों के बिल बने, पर वह एक जरूरी टेस्ट छूट गया— HbA2 HPLC।
​"अगर डॉक्टर ने उस वक्त संवेदनशीलता दिखाई होती, तो आज एक मासूम का जीवन और एक परिवार की आर्थिक स्थिति दांव पर न होती।"
​आज भी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे जन्म ले रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
​अज्ञानता: समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता का अभाव।
​चिकित्सीय लापरवाही: स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) द्वारा गर्भावस्था के दौरान अनिवार्य रूप से स्क्रीनिंग न करवाना।
​प्रणाली की विफलता: जब तक कानून कड़ा नहीं होगा, यह सिलसिला नहीं रुकेगा।
​आर्थिक और मानसिक बोझ
​एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए थैलेसीमिया का इलाज किसी आपदा से कम नहीं है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) पर लगभग 20 लाख रुपये का खर्च आता है। जो पैसा समाज निर्माण, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य में लगना चाहिए था, वह सिर्फ जीवित रहने के संघर्ष में स्वाहा हो रहा है।
​कड़े निर्णय लेने का समय
​अब समय आ गया है कि सरकार और समाज जागें। हमारी मांगें स्पष्ट होनी चाहिए:
​अनिवार्य जांच: शादी से पहले या गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में 'थैलेसीमिया प्रोफाइल' अनिवार्य किया जाए।
​जवाबदेही: यदि गर्भावस्था की मॉनिटरिंग के दौरान डॉक्टर ने यह जांच नहीं करवाई और बच्चा थैलेसीमिया के साथ पैदा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी और इलाज का खर्च उस डॉक्टर या संस्थान पर तय होना चाहिए।
​डेडलाइन: एक निश्चित तारीख के बाद 'जीरो थैलेसीमिया बर्थ' का लक्ष्य निर्धारित हो।
​हमारा संकल्प
​जो बच्चे इस दुनिया में आ चुके हैं, उन्हें बेहतर जीवन देना हमारा कर्तव्य है। लेकिन आने वाली पीढ़ियों को इस दर्द से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
​दिशा वेलफेयर एसोसिएशन का आह्वान:
​पहले: थैलेसीमिया / सिकल सेल का ज्ञान।
​फिर: शादी और संतान का अरमान।
​थैलेसीमिया मुक्त समाज - हमारा संकल्प, हमारी पहचान।
Sarabjeet Singh Narang Founder
Disha Welfare Association

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