सारंगढ़: भाजपा के 'घर चलो, बस्ती चलो' अभियान पर सवाल, मीडिया के सवालों से बच रहे जिम्मेदार नेता?
सारंगढ़-बिलाइगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी द्वारा 'घर चलो, बस्ती चलो' अभियान के तहत व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुँचाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर सूचनाओं के अभाव और नेताओं की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
संवाद का अभाव: संपादक के सवालों पर नहीं मिला सटीक जवाब
अभियान की वास्तविकता जानने के लिए जब आइमा मीडिया के संपादक द्वारा भाजपा की वरिष्ठ नेता सुश्री कामदा जोल्हे से संपर्क कर अभियान के मुख्य मुद्दों और लक्ष्यों पर चर्चा करनी चाही, तो उनकी ओर से कोई सटीक या स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हुआ। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब पार्टी "जनसंवाद" का दावा कर रही है, तो जिम्मेदार नेता मीडिया के साथ जानकारी साझा करने में संकोच क्यों कर रहे हैं?
क्या हैं इस अभियान के मुख्य मुद्दे? (सूत्रों के अनुसार)
भले ही स्थानीय स्तर पर स्पष्ट जानकारी न दी जा रही हो, लेकिन भाजपा के इस प्रदेशव्यापी अभियान के पीछे कुछ प्रमुख एजेंडे माने जा रहे हैं:
योजनाओं का ऑडिट: महतारी वंदन योजना, उज्ज्वला और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाओं का लाभ बस्तियों में मिल रहा है या नहीं, इसकी जाँच करना।
बूथ सशक्तिकरण: आगामी चुनावी तैयारियों के मद्देनजर हर बस्ती और मोहल्ले में कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करना।
सीधा संपर्क: घर-घर जाकर जनता की समस्याओं को सुनना और उन्हें शासन तक पहुँचाने का भरोसा दिलाना।
मीडिया का नजरिया
एक तरफ भाजपा कार्यकर्ता बस्तियों की धूल छान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नेतृत्व द्वारा मीडिया को अंधेरे में रखना इस अभियान की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। क्या यह अभियान सिर्फ एक औपचारिक आयोजन है या वास्तव में जनता की समस्याओं का निराकरण होगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।
"भाजपा का 'घर चलो, बस्ती चलो' अभियान: दावों और हकीकत के बीच कितना अंतर? आइमा मीडिया के सवालों पर भाजपा नेता सुश्री कामदा जोल्हे ने साधी चुप्पी।"
रिपोर्ट: संपादक, आइमा मीडिया (दारिकांत)