: "शिक्षा की नींव मजबूत करता 'नामांकन अभियान 2026''
"भविष्य की ओर एक सशक्त कदम"
विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पटना : बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से 'नामांकन अभियान 2026' की घोषणा एक स्वागत योग्य कदम है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस पोस्ट के माध्यम से अभिभावकों और स्थानीय निवासियों से अपील की गई है कि वे 6 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का नामांकन पास के विद्यालयों में कराएं।
जमीनी स्तर पर सक्रियता:
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत इसका 'विकेंद्रीकृत' दृष्टिकोण है। केवल आदेश जारी करने के बजाय, प्रशासन ने टोला सेवकों और तालीमी मरकज के सदस्यों को गृह भ्रमण की जिम्मेदारी सौंपी है।
यह सुनिश्चित करता है कि समाज के सबसे वंचित वर्गों तक भी शिक्षा की पहुंच हो और कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे।
चुनौतियां और अपेक्षाएं:
अभियान की सफलता केवल नामांकन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली चुनौती इन बच्चों को स्कूल में बनाए रखने (Retention) और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की है।
"हर बच्चा हो, अब स्कूल का हिस्सा" नारा तभी सार्थक होगा जब स्कूलों में बुनियादी ढांचा, शिक्षकों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन जैसी सुविधाएं सुदृढ़ होंगी।
निष्कर्ष:
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि शिक्षा किसी भी राज्य की प्रगति का आधार होती है।
बिहार जैसे राज्य में, जहाँ जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) बहुत अधिक है, इस तरह के अभियान बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकते हैं।
समाज के हर वर्ग को इस 'नामांकन उत्सव' में अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा पीछे न छूटे।