उत्तर प्रदेश में नाव सुरक्षा पर बड़ा सवाल: सख्त नियमों की मांग तेज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक खुला पत्र इन दिनों चर्चा में है, जिसमें राज्य की नदियों में चलने वाली नावों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। विशेष रूप से वृंदावन और मथुरा में हाल ही में हुए हादसों के बाद यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है।
पत्र में बताया गया है कि गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियों में हर दिन हजारों श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग नावों के माध्यम से यात्रा करते हैं। लेकिन बार-बार हो रही दुर्घटनाएं और लापरवाही यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं।
इस संबंध में सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं। इनमें नाव संचालकों की सख्त जिम्मेदारी तय करना, ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध, सभी यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य करना और नावों की नियमित सुरक्षा जांच शामिल हैं।
इसके अलावा, हर नाव पर प्रशिक्षित चालक, मैकेनिक और सहायक की नियुक्ति, वैध लाइसेंस और बीमा की अनिवार्यता, तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि प्रमुख घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ या आपातकालीन बचाव दल की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
नावों की बनावट और सुरक्षा मानकों पर भी जोर देते हुए कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन में उपयोग होने वाली नावें निर्धारित डिज़ाइन और स्थिरता मानकों का पालन करें तथा उन पर आपातकालीन नंबर स्पष्ट रूप से लिखे जाएं।
वृंदावन में हाल ही में हुए हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्र में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग की गई है, ताकि जनता का भरोसा बहाल किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। ऐसे में सरकार से जल्द और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।