पूर्व कृषि मंत्री कमल पटेल गंजाल मोरन डैम काका झूठा श्रेय ले रहे हैं ब्लॉक Congress
अध्यक्ष शंकर सिंह सोलंकी
गांजाळ मोरण के नाम पर पूर्व मंत्री झूठा श्रेय लेना चाहते हैं. शंकर सोलंकी
गांजाळ मोरन डेम सन 1972 का प्रस्तावित है जब 2013 में विधायक आर के दोगने जी द्वारा विधानसभा में खिरकिया क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्थाओं को लेकर मुद्दा उठाया गया तब गजल मोरान डेम निकाल कर सामने आया जब विधायक दोगने जी द्वारा उसकी पूरी रूपरेखा को समझा और इस सिंचाई परियोजना के पीछे लगे जैसे ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई उस समय इस परियोजना को स्वीकृत कर इसका टेंडर हुआ उसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा इसका भूमि पूजन सन 21/22 में किया गया लेकिन पर्यावरण की noc नहीं मिलने से इसका काम अटक गया जैसे ही 23 में दोगने जी चुनाव जीते और उनके आर्थिक प्रयासों से गंजाल की noc मिल गई कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के हरदा दौरे कार्यक्रम में दोगने जी ने उनको भी अवगत करवाया था की गंजाल डैम की noc मिल गई है इसका काम जल्दी शुरू किया जावे.
ब्लॉक अध्यक्ष सोलंकी ने कहा की मंत्री जी ने तीन दशक क्षेत्र कर प्रतिनिधित्व किया खुद के कार्यकाल मे कुछ कर नही पाए वर्तमान विधायक ओर उनकी मेहनत ओर कांग्रेस सरकार मे स्वीकृत कार्यों कर अब श्रेय लेकर किसानों पर अहसान जताना चाह रहें है.
तीन दशक मे पूर्व मंत्री चाहते तो क्षेत्र कहां से कहां होता परन्तु मंत्री जी खुद के कार्यकाल मे कोई उल्लेखित कार्य करवा नही पाए ओर आज श्रेय की लड़ाई लड़ रहे है.
यह बात ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शंकर सिंह सोलंकी ने प्रेस नोट जारी किया 2 दिन पूर्व कुछ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने चारवा क्षेत्र के किसानों को गुमराह करके बताया कि मुगल सिंचाई परियोजना से इन गांवों को जोड़ना है तो हमें पूर्व मंत्री के पास चलना चाहिए सभी लोग इस मांग को लेकर पूर्व मंत्री के पास पहुंचे लेकिन वहां पर मुगल सिंचाई परियोजना की बात ना करते हुए गजाल मोरान की बात की गई जो पहले से ही स्वीकृत है और जल्दी ही उसका काम शुरू होने वाला है कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जो बड़ी सिंचाई परियोजना कांग्रेस शासनकाल में स्वीकृत हुई है चाहे तबा डेम हो चाहे इंदिरा सागर हो चाहे गंजाल मोरान हो