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: बिहार में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: "आदापुर का 'रिश्वतखोर' मुंशी निगरानी के जाल में फंसा"



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​पटना/मोतिहारी: बिहार सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति धरातल पर कड़ाई से उतरती दिख रही है।
ताजा मामले में, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के आदापुर थाना क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए निजी मुंशी, श्री इन्तेखाब आलम को 14,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

​हथियार लाइसेंस के नाम पर वसूली का खेल:
यह पूरी कार्रवाई एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायतकर्ता श्री आफताब अंसारी ने ब्यूरो के पटना कार्यालय में गुहार लगाई थी कि उनके हथियार के लाइसेंस आवेदन के सत्यापन के बदले थाने के मुंशी द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।

​निगरानी का 'ट्रैप' और गिरफ्तारी:
आरोपों की पुष्टि होने के बाद, पुलिस उपाधीक्षक श्री गौतम कृष्ण के नेतृत्व में एक विशेष 'धावादल' का गठन किया गया।
योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया और जमुनापुर चौक के पास जैसे ही मुंशी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया।

​भ्रष्टाचार मुक्त बिहार की ओर कदम:
निगरानी ब्यूरो की यह कार्रवाई न केवल भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी मजबूत करती है।
वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ब्यूरो ने जिस तरह से ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की हैं, वह स्पष्ट करता है कि अब रिश्वतखोरी के लिए कोई जगह नहीं बची है।

​अभियुक्त को अब मुजफ्फरपुर स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और भ्रष्टाचार की दीमक को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

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