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MP कांग्रेस में 'सर्जरी' की तैयारी: "परफॉर्म करो या पद छोड़ो" — जीतू पटवारी का जिलाध्यक्षों को अल्टीमेटम

भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस में अब केवल पद पर बने रहने से काम नहीं चलेगा। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में अब केवल वही टिकेगा जो सड़क पर संघर्ष करेगा। "संगठन सृजन अभियान" के तहत भोपाल में 71 जिलाध्यक्षों के कामकाज की बड़ी समीक्षा होने जा रही है।
सख्त नीति: पार्टी ने "परफॉर्म या परे हटो" की नीति अपनाई है। निष्क्रिय पाए जाने वाले जिलाध्यक्षों की छुट्टी होना तय है।
फोकस जिले: भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्र के कई जिलों (रीवा, सतना, सागर, मुरैना आदि) में संगठन की सुस्ती को लेकर नेतृत्व गंभीर है।
मूल्यांकन के आधार: जनता के मुद्दों (महंगाई, बेरोजगारी, किसान) पर सक्रियता, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना और बूथ स्तर पर मजबूती।
अनुशासन का संदेश: इंदौर के 'वंदे मातरम' विवाद जैसे मामलों के बीच पार्टी अब अनुशासन को लेकर भी कड़ा रुख अपना रही है।
"अब कुर्सी नहीं, काम बोलेगा—जो ज़मीन पर नहीं दिखेगा, वो संगठन में नहीं टिकेगा।" — यह संदेश देकर जीतू पटवारी ने साफ कर दिया है कि भाजपा की संगठनात्मक मशीनरी से लड़ने के लिए कांग्रेस अब युवा और ऊर्जावान चेहरों को आगे लाएगी।
निष्कर्ष: कांग्रेस का यह 'सृजन अभियान' आने वाले चुनावों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, बशर्ते निष्क्रिय नेताओं पर गाज गिरे और मेहनत करने वालों को कमान मिले।

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