जहाँ कलयुग का प्रवेश नहीं वह मंदिर 🛕..
उत्तर प्रदेश के वृंदावन में स्थित 'टटिया स्थान' एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे कलयुग के प्रभाव से मुक्त माना जाता है। यहाँ के लोग आज भी आधुनिक उपकरणों और सुविधाओं से पूरी तरह दूर, एक अत्यंत सादा और प्राचीन जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
इस स्थान पर बिजली या किसी भी प्रकार की आधुनिक मशीन का उपयोग नहीं होता है। स्थानीय लोग आज भी रोशनी के लिए लैंप का इस्तेमाल करते हैं और अपने सभी कार्य हाथों से करते हैं। उनका मुख्य कार्य ठाकुर जी की पूजा, गौसेवा और संतों की सेवा करना है।
ऐतिहासिक रूप से यह स्थान बांके बिहारी जी के परम भक्त स्वामी हरिदास जी का ध्यान स्थल रहा है। शुरुआत में यह पूरी जगह बांस के डंडों से घिरी हुई थी, जिसे स्थानीय भाषा में 'टटिया' कहा जाता है। इसी कारण इस स्थान का नाम 'टटिया स्थान' पड़ गया। प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस क्षेत्र में लोग आज भी भौतिक सुख-सुविधाओं के बजाय ईश्वरीय भक्ति और प्रकृति के करीब सादगीपूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं।
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