जन्मभूमि से कर्मभूमि तक की प्रेरणादायक यात्रा — शिक्षाविद् खीम सिंह राठौड़ को जन्मदिन पर कोटि-कोटि बधाइयाँ
सियाणा (रामसिंह महेचा)। निकटवर्ती गांव बाग
जन्मभूमि से कर्मभूमि तक की प्रेरणादायक यात्रा — शिक्षाविद् खीम सिंह राठौड़ को जन्मदिन पर कोटि-कोटि बधाइयाँ
सियाणा (रामसिंह महेचा)। निकटवर्ती गांव बागरा के मूल निवासी, प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी एवं पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बागरा के प्रधानाचार्य श्री खीम सिंह राठौड़ का आज जन्मदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर उनके शुभचिंतकों, विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों द्वारा उन्हें ढेरों शुभकामनाएं प्रेषित की जा रही हैं।
श्री राठौड़ का जीवन “जन्मभूमि से कर्मभूमि” तक की एक प्रेरणादायक गाथा है। एक साधारण किसान एवं क्षत्रिय परिवार में जन्मे राठौड़ अपने परिवार के इकलौते साक्षर सदस्य रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बिना किसी ट्यूशन या बाहरी सहायता के अंग्रेज़ी साहित्य में एमए कर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और अंग्रेज़ी शिक्षक के रूप में सेवाएं प्रारंभ कीं।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बागरा के माध्यमिक विद्यालय से प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सियाणा से पूरी की। इसके पश्चात जालौर कॉलेज से स्नातक और अजमेर से बी.एड. कर शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेज़ी) के पद पर नियुक्त हुए। अपने 31 वर्षों के लंबे सेवाकाल में उन्होंने जालौर के विभिन्न विद्यालयों में वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता और उप प्राचार्य के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं दीं। साथ ही राजेंद्र नगर विद्यालय में उप प्राचार्य एवं तड़वा (सायला ब्लॉक) में प्रधानाचार्य के रूप में भी कार्य किया।
वर्तमान में वे अपने ही गृह कस्बे बागरा के उसी विद्यालय में प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत हैं, जहां उन्होंने स्वयं दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की थी। यह उपलब्धि उनके संघर्ष, समर्पण और दृढ़ निश्चय का जीवंत उदाहरण है। उनका कहना है कि जिस विद्यालय में कभी जाने में डर लगता था, आज वहीं प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करना उनके लिए गर्व का विषय है—और यह सब शिक्षा की शक्ति एवं ईश्वर की कृपा से संभव हुआ है।
श्री राठौड़ का मानना है कि जीवन में संघर्ष और अभावों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि आत्मविश्वास, कठोर परिश्रम और दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। यही सफलता का मूल मंत्र है।
आज वे हजारों विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, प्रेरणा स्रोत और आदर्श बन चुके हैं। उनके नेतृत्व में विद्यालय निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। साथ ही वे क्षत्रिय भोमिया राजपूत सेवा संस्थान, खंड बागरा के सलाहकार के रूप में भी समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
उनके जन्मदिवस के अवसर पर क्षेत्रवासियों, विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सभी ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन को युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।