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*सूर्यमुनि चिकित्सालय में विश्व होमियोपैथी दिवस मनाया गया*

*राजू गजभिये सोशल मीडिया एक्टीवीस्ट पत्रकार* *सूर्यमुनि चिकित्सालय में विश्व होमियोपैथी दिवस मनाया गया*

बदनावर।
सूर्यमुनि चिकित्सालय में 10 अप्रैल को विश्व होमियोपैथी दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। यह दिवस महान चिकित्सक Samuel Hahnemann की जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जिन्होंने होमियोपैथी चिकित्सा पद्धति की खोज कर इसे विश्वभर में एक सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार प्रणाली के रूप में स्थापित किया।

कार्यक्रम में होमियोपैथी के मूल सिद्धांत “समरूपता का सिद्धांत” पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि जो पदार्थ किसी स्वस्थ व्यक्ति में रोग के लक्षण उत्पन्न करता है, वही अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में रोगी को देने पर उन लक्षणों को दूर करने में सहायक होता है। यही कारण है कि होमियोपैथी दवाइयाँ हल्की, सुरक्षित एवं दुष्प्रभाव रहित मानी जाती हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में होमियोपैथी एलर्जी, त्वचा रोग, सर्दी-जुकाम, माइग्रेन, पाचन समस्याओं सहित अनेक दीर्घकालिक रोगों में प्रभावी सिद्ध हो रही है। यह पद्धति केवल लक्षणों का उपचार नहीं करती, बल्कि व्यक्ति की संपूर्ण शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर उपचार प्रदान करती है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर बल देती है।

इस अवसर पर राजेश जी जैन (फुलजी बा) ने अपने उद्बोधन में बताया कि होमियोपैथी मानवता के लिए एक अमूल्य वरदान है, जिसे Samuel Hahnemann ने विश्व को प्रदान किया।

वहीं डॉ.दीप शिखा जी जैन द्वारा बदनावर क्षेत्र में निरंतर होमियोपैथी के प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक सेवा कार्य किए जा रहे हैं। उनके प्रयासों से समाज में इस चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है तथा अधिकाधिक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य वैद्य राजकुमार चोपड़ा, फिजियोथेरेपिस्ट विष्णु पाटीदार, श्री सुरेंद्र मूणत, श्री सुरेश गांधी, श्रीमती शालिनी पाटोदी, दिनेश जी शर्मा, मीनाक्षी जी एवं सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं मरीज उपस्थित रहे।

विश्व होमियोपैथी दिवस के अवसर पर सभी ने प्राकृतिक, सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार पद्धति के रूप में होमियोपैथी को अपनाने का संदेश दिया।

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