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शेरघाटी की सड़कों पर सियासी उबाल: "असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल"



विजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

​गया/शेरघाटी: बिहार की राजनीतिक धरती एक बार फिर राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर गरमा गई है। गया जिला कांग्रेस कमेटी (दक्षिणी भाग) के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार के तत्वावधान में शेरघाटी के थाना मोड़ पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया और उनके बयानों व नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​संविधान बचाओ और विरोध की गूँज:
प्रदर्शन के दौरान मुख्य आकर्षण का केंद्र वह बैनर रहा जिस पर 'संविधान रक्षक' के रूप में राहुल गांधी की तस्वीर और बाबा साहब अंबेडकर सहित अन्य महापुरुषों के चित्र अंकित थे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि असम के मुख्यमंत्री की बयानबाजी और कार्यशैली लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। शेरघाटी की सड़कों पर जुटे कार्यकर्ताओं ने संदेश दिया कि वे किसी भी राज्य में हो रहे 'अन्याय' के खिलाफ एकजुट हैं।

​चुनावी आहट और बढ़ता विरोध:
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के राजनीतिक घटनाक्रमों और विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए कांग्रेस अब क्षेत्रीय स्तर पर भी आक्रामक रुख अपना रही है।
शेरघाटी का यह प्रदर्शन केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि पार्टी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को उनके गढ़ से बाहर भी घेरने की कोशिश कर रही है।

​निष्कर्ष:
पुतला दहन कार्यक्रम के जरिए गया जिला कांग्रेस ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक सत्ता पक्ष अपनी नीतियों में बदलाव नहीं लाता। शेरघाटी थाना मोड़ पर हुआ यह हंगामा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और कितनी गर्मी पैदा करेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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