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आज मानव जिस प्रकार से आडम्बर, और अन्धकार मे नर्क के समान जीवन मृतक के रूप मे उस परमेश्वर स्वरूप परम तत्व को मूल कर मृतक आत्माओ की पुजारी

बन कर ब्रह्म रूप का त्रिसकार कर रहै है और पथ भ्रष्टाचार मे लिप्त है।जब कि मानव रूप से वह शक्तिमान जिसने सुरज चांद हर जीव को बनाया है। उसको भूलकर मूर्तिकार की बनाई महान संत व अन्य महत्वपूर्ण समाज के लोग-बाग की लगाकर भूल कर रहे है।ठीक है उनके विचार, लक्ष्य, विकास ,आध्यात्मिक, आर्थिक, शैक्षिक आदान-प्रदान नही कर रहे है। वनस्पति विज्ञान,और जीव विज्ञान जो निःशुल्क पारम्परिक तरीके से गरीब अमीर के स्वास्थ्य ठीक करता है। डॉक्टर भी ईश्वर अमृत तुल्य ही है। जातिवाद, कबिलाई विनाशक दवाई है जिसके खाने से जीव मर जाते है। सरकार व अन्य समाज के लोग मुर्ति लगाकर मानसिक रूप सेलोग-बाग को भ्रमित करते हुए कमजोर कर रही है।और अशांत वातावरण तैयार कर समाज को कमजोर कर रही है।जब कि मुर्ति पुजा,शराब, जूवा, सिगरेट जैसे पर शक्ति से प्रतिबंध लगने मे भलाई होनी चाहिए। डा.ब्रह्म सिंह प्रालियान बी.ए.एम.एस. एम.डी.अध्यक्ष पर्वतीय मानव विकास समिति बुग्गावाला.हरिद्वार उत्तराखंड भारत।

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