रायसेन में आज से शुरू होगा तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव, राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन
भोपाल, 11 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रायसेन में आज से तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के उन्नत कृषि महोत्सव, प्रदर्शनी और प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इस भव्य आयोजन का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। 11 से 13 अप्रैल तक जिला मुख्यालय के दशहरा खेल मैदान में आयोजित इस महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे।
जनसंपर्क अधिकारी अनुभा सिंह के अनुसार, इस महोत्सव में कई मंत्री, केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक, देशभर के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान 20 विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनके लिए चार अलग-अलग सेमिनार हॉल तैयार किए गए हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सुबह 11:25 बजे भोपाल से रायसेन पहुंचेंगे और 11:30 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक उद्घाटन सत्र में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे शाम को 5:45 बजे भोपाल के लिए रवाना होंगे।
इस उन्नत कृषि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देना है। किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी नहीं, बल्कि लाइव डेमो और व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए नई तकनीकों को समझाया जाएगा, ताकि वे इन्हें अपने खेतों में आसानी से लागू कर सकें।
महोत्सव में कृषि मशीनीकरण के तहत रीपर, पावर वीडर, स्प्रेयर, सीडर, बेलर, रोटावेटर और कृषि ड्रोन का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं सूक्ष्म सिंचाई और सटीक कृषि के अंतर्गत उर्वरता प्रबंधन, स्वचालन, सौर पंपिंग और एकीकृत सिंचाई प्रणाली की जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, मोबाइल कोल्ड स्टोरेज, नर्सरी, मधुमक्खी पालन, बागवानी कलम तकनीक और पशुपालन-मत्स्य पालन के जीवित मॉडल भी किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। विशेषज्ञ किसानों को बताएंगे कि एक हेक्टेयर भूमि में एकीकृत कृषि मॉडल से अधिकतम आय कैसे प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में बीज कोटिंग, प्राकृतिक खेती, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक तकनीक, दलहन, बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों पर विशेष फोकस रहेगा।
साथ ही फसल, फल, सब्जियां, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि-वानिकी को जोड़ते हुए एकीकृत कृषि के वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र में चार कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान और अधिकारी प्रस्तुति देंगे, जिसके बाद किसानों के सवालों के जवाब भी दिए जाएंगे।