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भारत में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के सबसे बड़े और सस्ते तरीके

भारत (खासकर पंजाब) में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के सबसे बड़े और सस्ते तरीके हैं, लेकिन बदकिस्मती से उन्हें सबसे कम अपनाया जाता है। मैं आपको सबसे असरदार और प्रैक्टिकल सुझाव देता हूँ (जो दुनिया के सबसे अच्छे सिस्टम में भी लागू होते हैं): 1. पहला और सबसे बड़ा सुधार (जिसके बारे में हमने पहले बात की थी) सभी चुने हुए प्रतिनिधियों, अधिकारियों, जजों, प्रोफेसरों आदि के बच्चे 18 साल की उम्र तक सिर्फ सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे। यही एकमात्र तरीका है जिससे 3-5 साल में पूरा सिस्टम बदल जाएगा। इसीलिए फिनलैंड, सिंगापुर, क्यूबा आदि में सरकारी स्कूल वर्ल्ड क्लास हैं। 2. टीचरों को “असली पावर” देना, प्रिंसिपल को टीचरों को नौकरी पर रखने/निकालने का अधिकार देना (जैसा दिल्ली के कुछ स्कूलों में किया गया है)। सैलरी काटने और गैरहाजिर टीचरों को निकालने के सख्त नियम (बायोमेट्रिक अटेंडेंस + CCTV)। पंजाब में 2025-26 में भी 20-30% टीचर रोजाना गैरहाजिर रहते हैं – इसे ठीक कर दो और आधा सुधार अपने आप हो जाएगा। 3. पैसे का सही इस्तेमाल पंजाब को सरकारी स्कूलों के लिए हर साल हज़ारों करोड़ मिलते हैं (समग्र शिक्षा अभियान, मिड-डे मील वगैरह) लेकिन ज़्यादातर पैसा “कागज़ों पर” खर्च दिखाकर बर्बाद हो जाता है। हर स्कूल का सालाना बजट सीधे प्रिंसिपल/SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) को दें – जैसा राजस्थान और केरल में किया जा रहा है। 4. प्राइमरी एजुकेशन (पहली से 8वीं तक) पर फोकस करें। अगर फाउंडेशन मजबूत नहीं है, तो 10वीं-12वीं में कोई फायदा नहीं है। पंजाब में 50% से ज़्यादा बच्चे 5वीं क्लास तक पढ़ नहीं पाते (ASER रिपोर्ट 2023-24)। इसलिए, “निपुण पंजाब” जैसे प्रोग्राम को गंभीरता से लागू करें। 5. सफल मॉडल जो पहले से चल रहे हैं (पंजाब में भी कॉपी किए जा सकते हैं) दिल्ली मॉडल (AAP सरकार): 2015 से 2025 तक सरकारी स्कूलों का बजट 10 गुना बढ़ाया गया, नई बिल्डिंग्स, टीचर ट्रेनिंग → आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10वीं-12वीं के रिजल्ट प्राइवेट स्कूलों से बेहतर हैं। हिमाचल प्रदेश: 90% से ज़्यादा बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, रिज़ल्ट 95%+। केरल: 98% बच्चे सरकारी/एडेड स्कूलों में – क्योंकि वहाँ का सिस्टम अच्छा है और अमीर-गरीब सभी पढ़ते हैं। शॉर्ट में: सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहली और सबसे ज़रूरी चीज़ है “पॉलिटिकल और ब्यूरोक्रेटिक क्लास की भागीदारी”। अगर उनके अपने बच्चे पढ़ेंगे, तो बाकी सभी सुधार अपने आप हो जाएँगे – पैसा आएगा, टीचर आएँगे, बिल्डिंग बनेंगी। बाकी टेक्नोलॉजिकल सुधार (स्मार्ट क्लास, टीचर ट्रेनिंग वगैरह) बाद में होंगे। पहले “गेम में अपनी जान लगाओ”, फिर सब ठीक हो जाएगा।
🍳*हरबंस सिंह, एडवाइज़र* 🙏🏻
शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब, गोल्डन एवेन्यू, धारीवाल, ज़िला गुरदासपुर+91-8054400953,

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