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कविता: माँ की बातें शेख जमीरुल हक खान चौधरी


माँ की बातें, मीठी लगती,
जैसे हो कोई सरगम प्यारी,
थके हुए मन को सहलाती,
जैसे छाया हो सुख की न्यारी।

जब भी मैं उदास हो जाता,
माँ हँसकर गले लगा लेती,
बिन बोले ही सब समझ जाती,
आँखों से ही बात कह देती।

माँ की बातें सीख सिखाती,
जीवन का हर राज बताती,
सच की राह पर चलना सिखाकर,
हर मुश्किल से पार लगाती।

जब गिरता हूँ, हाथ थामकर,
फिर से मुझको खड़ा करती है,
हिम्मत देकर, प्यार लुटाकर,
जीने की राह दिखाती है।

माँ की बातें दीपक जैसी,
अंधियारे में उजियारा हैं,
उसकी हर एक मीठी शिक्षा,
जीवन का सहारा है।

माँ की बातें, अमृत जैसी,
हर दुख को हल्का कर देतीं,
दुनिया चाहे कुछ भी बोले,
माँ ही सच्ची राह दिखाती। 😊

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