महाराष्ट्र में जनगणना का बिगुल बजा: प्रगणकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम घोषित, अब 'ऐप' से होगा डेटा संकलन!
जनगणना के लिए पूरी तरह तैयार महाराष्ट्र सरकार; प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण, CMMS पंजीकरण और डिजिटल प्रक्रिया की पूरी जानकारी।
मुंबई: कोरोना काल के कारण लंबे समय से टली जनगणना की प्रक्रिया अब महाराष्ट्र में जोर-शोर से शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने आगामी जनगणना-2027 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य मानते हुए अपनी पूरी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी डॉ. निरुपमा डांगे के हस्ताक्षर से जारी परिपत्रक ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार जनगणना की प्रक्रिया न केवल डिजिटल होगी, बल्कि बेहद व्यवस्थित और पारदर्शी भी होगी।
प्रशिक्षण का विस्तृत कार्यक्रम
प्रपत्र के अनुसार, राज्य भर में 23 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच प्रशिक्षण के विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
बैच का आकार: प्रत्येक बैच में 40 से 45 प्रशिक्षणार्थी होंगे (अधिकतम सीमा 50)।
विशेष टीम: प्रत्येक बैच को दो फील्ड ट्रेनर्स की टीम प्रशिक्षित करेगी।
प्रशिक्षण पद्धति: इस वर्ष 'कैस्केड' (Cascade) पद्धति अपनाई गई है। पहले फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे चलकर प्रगणकों (Enumerators) और पर्यवेक्षकों (Supervisors) को मार्गदर्शन देंगे।
तीन दिवसीय सत्र: प्रशिक्षण में सैद्धांतिक (Theoretical) और व्यावहारिक (Practical) दोनों सत्र शामिल होंगे, जिसमें मुख्य जोर मोबाइल ऐप के उपयोग और डेटा संकलन पर होगा।
डिजिटल तकनीक का बोलबाला: CMMS अनिवार्य
इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी। जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बैच निर्माण से लेकर उपस्थिति और डेटा प्रबंधन तक, सब कुछ इसी ऐप के जरिए होगा। इसके अलावा, प्रशिक्षण स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल और भोजन की उत्तम व्यवस्था करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
'सेवा भाव' प्रतिज्ञा: गोपनीयता और पारदर्शिता पर जोर
प्रशिक्षण की शुरुआत और अंत में अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही, जनगणना की गरिमा और संवेदनशीलता को बनाए रखने के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को 'सेवा भाव' प्रतिज्ञा लेनी होगी। इस प्रतिज्ञा का मुख्य उद्देश्य नागरिकों से प्राप्त जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना और निष्पक्ष होकर कार्य करना है।
निष्कर्ष: महाराष्ट्र सरकार की इस व्यापक और तकनीकी रूप से उन्नत तैयारी से यह उम्मीद की जा रही है कि जनगणना-2027 के आंकड़े न केवल सटीक होंगे, बल्कि पूरी तरह से विश्वसनीय भी होंगे।