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संत गाडगेबाबा मानव मुक्ति का मंत्र देने वाले संत थे: डॉ. भगवान लोखंडे


द.ग. तटकरे कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय के 'आजीवन अध्ययन एवं विस्तार विभाग' तथा IQAC विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ९ अप्रैल २०२६ को सामाजिक समता सप्ताह के अवसर पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया। "संत गाडगेबाबा: जीवन और कार्य" विषय पर आयोजित इस वेबिनार में मुख्य वक्ता के रूप में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. भगवान लोखंडेउपस्थित थे।
स्वच्छता से परे गाडगेबाबा का व्यापक दर्शन
अपने व्याख्यान में डॉ. लोखंडे ने समाज में बनी संत गाडगेबाबा की केवल "स्वच्छता अभियान" तक सीमित छवि पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि:
"संत गाडगेबाबा के विचार और कार्य केवल झाड़ू पकड़ने तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे उसके कहीं आगे गहरे सामाजिक दर्शन से जुड़े थे। उनके पहनावे और प्रतीकों के पीछे एक गहरा समाजशास्त्र, मानवीय मूल्य और जीवन दृष्टि छिपी थी।"
डॉ. लोखंडे ने गाडगेबाबा द्वारा प्रतिपादित 'दशसूत्री' (दस सिद्धांतों) को मानवतावाद, तर्कवाद और समाजवाद—इन तीन प्रमुख भागों में वर्गीकृत करते हुए उनके क्रांतिकारी विचारों को प्रस्तुत किया।
चार मुक्ति के मार्ग: विकास की आधारशिला
बहुजन समाज और समग्र मानवता के उत्थान के लिए गाडगेबाबा की 'चार धाम' की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए डॉ. लोखंडे ने कहा कि ये चार धाम वास्तव में मुक्ति के चार मार्ग हैं:
१. ऋण मुक्ति (कर्ज से आजादी)
२. दरिद्र मुक्ति (गरीबी से आजादी)
३. व्यसन मुक्ति (नशे से आजादी)
४. अज्ञान मुक्ति (अशिक्षा से आजादी)
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन चार मुक्तियों के बिना आज भी कोई भी मानव समूह विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ सकता।
अध्यक्षीय संबोधन एवं सहभागिता
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नानासाहेब यादव ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में गाडगेबाबा के अंधविश्वास उन्मूलन और समाज परिवर्तन के विचारों पर प्रकाश डाला।
प्रास्ताविक:डॉ. राजाराम थोरात ने संत गाडगेबाबा के जीवन परिचय के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा रखी।
संचालन: प्रो. सोनम पवार ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया।
आभार प्रदर्शन:प्रो. श्रीमती महाडिक ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर जी.एम. वेदक महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. संतोष बंगाले सहित उनके महाविद्यालय का स्टाफ, द.ग. तटकरे महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक, कार्यालयीन कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित थे।

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