समस्याओं की अनदेखी पर भड़के किसान; कुंडा तहसील में 'आर-पार' की जंग शुरू!
प्रतापगढ़ के कुंडा में आज किसानों का धैर्य जवाब दे गया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने तहसील मुख्यालय पर उपजिलाधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद एसडीएम द्वारा उनकी समस्याओं को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।
मुख्य समाचार
स्थान: कुंडा तहसील, प्रतापगढ़
तारीख: 9 अप्रैल 2026
प्रतापगढ़ जिले की कुंडा तहसील आज किसानों के नारों से गूंज उठी। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश पटेल के नेतृत्व में सैकड़ों किसान अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए हैं। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह धरना अब तभी समाप्त होगा जब उनकी समस्याओं का ठोस निस्तारण होगा।
अधिकारियों पर वादाखिलाफी का आरोप:
कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्यामलाल यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन प्रशासन ने केवल आश्वासन दिया, समाधान नहीं। उपजिलाधिकारी (SDM) की इस उदासीनता से किसानों में गहरा आक्रोश है।
"जब तक किसानों की समस्याओं का निदान नहीं होगा, यह धरना दिन-रात जारी रहेगा।"
— ओमप्रकाश पटेल (जिला अध्यक्ष)
धरने में शामिल मुख्य चेहरा:
इस विशाल प्रदर्शन में संगठन के जिले से लेकर ब्लॉक स्तर के दिग्गज पदाधिकारी मुस्तैद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
मनोज कुमार यादव (जिला उपाध्यक्ष)
राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय (जिला सलाहकार)
ओमप्रकाश जायसवाल (जिला महामंत्री)
किसुन कुमार विश्वकर्मा (जिला कोषाध्यक्ष)
फूलचंद गौतम (जिला सचिव)
गुड्डी देवी सोनी व सीता गौतम (महिला जिला उपाध्यक्ष)
अजीत मिश्रा (जिला मीडिया प्रभारी )
सुजीत मिश्रा (तहसील मीडिया प्रभारी कुंडा )
जमीनी स्तर पर एकजुटता:
तहसील अध्यक्ष राजेश कुमार पाल और महिला तहसील अध्यक्ष सीमा सरोज के साथ-साथ कालाकांकर ब्लॉक अध्यक्ष विजय शंकर धुरिया, महिला ब्लॉक अध्यक्ष नीलम देवी यादव और बाबागंज से फूलचंद सरोज व रावेंद्र कुमार यादव राजेश कुमार पाल तहसील अध्यक्ष कुन्डा, सीमा सरोज महिला तहसील अध्यक्ष कुन्डा, बिजया शंकर धुरिया ब्लाक अध्यक्ष कालाकांकर, नीलम देबी यादव महिला ब्लाक अध्यक्ष कालाकांकर , रावेन्द्र कुमार यादव ब्लाक उपाध्यक्ष बाबागंज, फूलचंद सरोज ब्लाक अध्यक्ष बाबागंज ने भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ ताल ठोक दी है।
रात के अंधेरे में भी किसानों का जोश कम नहीं हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'अनिश्चितकालीन' घेराबंदी के आगे कब झुकता है और किसानों को न्याय मिलता है या नहीं।