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“टंकी बिना टैंक: लाखों खर्च, पानी की एक बूंद नहीं!” “ऊंचा ढांचा तैयार, लेकिन पानी गायब – विकास अधूरा!” “सरकारी टंकी बनी शोपीस, जनता अब भी प्यासे”

🟥 अधूरी पानी टंकी बनी शोपीस, जनता प्यासे — जिम्मेदार कौन? 🟥

जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा।
क्षेत्र में बनाई गई पानी की ऊंची टंकी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि टंकी का पूरा स्ट्रक्चर, सीढ़ियां, प्लेटफॉर्म और रंग-रोगन तक का कार्य पूरा कर दिया गया, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा — पानी संग्रहण के लिए टैंक का निर्माण ही नहीं किया गया।

इस कारण लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद यह टंकी सिर्फ लोहे-सीमेंट का ढांचा बनकर खड़ी है, जिसका स्थानीय लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

🔍 अधूरा काम, उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब टंकी बनानी ही थी, तो केवल ढांचा तैयार कर काम अधूरा क्यों छोड़ दिया गया। बिना टैंक के पूरी संरचना बेकार साबित हो रही है।

⚠️ सरकारी धन की बर्बादी?

ग्रामीणों ने इस मामले को सरकारी लापरवाही और धन के दुरुपयोग से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते काम पूरा नहीं किया गया, तो यह ढांचा भी धीरे-धीरे खराब हो सकता है।

📢 प्रशासन से मांग

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि:

जल्द से जल्द टैंक का निर्माण पूरा किया जाए

पूरे प्रोजेक्ट की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो

क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को सुचारु किया जाए


🗣️ जनता की आवाज

“टंकी बन गई, लेकिन पानी नहीं — आखिर इसका क्या फायदा?”

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