झारखंड में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब सख्ती शुरू हो गई है।
झारखण्ड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 के तहत राँची जिले में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक समाहरणालय स्थित NIC सभागार में आयोजित की गई।
बैठक का उद्देश्य निजी विद्यालयों की फीस पर नियंत्रण, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अभिभावकों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना रहा। इस पहल को राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्राथमिकता से जोड़ा जा रहा है।
क्या हैं बड़े फैसले?
फीस बढ़ोतरी पर नियंत्रण
स्कूल अब अधिकतम 10% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं
10% से अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला समिति की अनुमति जरूरी
हर स्कूल में PTA और फीस समिति अनिवार्य
सभी निजी स्कूलों को PTA (अभिभावक-शिक्षक संघ) बनाना होगा
जानकारी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर देना जरूरी
किताबों पर बड़ा नियम
CBSE स्कूल अब NCERT के अलावा किताबें अनिवार्य नहीं कर सकेंगे
किताबें 5 साल से पहले नहीं बदलेंगी
यूनिफॉर्म और ट्रांसपोर्ट पर राहत
यूनिफॉर्म बार-बार नहीं बदले जाएंगे (कम से कम 5 साल का अंतर)
किसी खास दुकान से खरीदने की मजबूरी खत्म
बस शुल्क भी फीस नियम के तहत ही बढ़ेगा
एडमिशन और परीक्षा नियम
प्रमोशन पर दोबारा एडमिशन फीस नहीं
कोई छात्र परीक्षा से वंचित नहीं होगा
RTE के तहत 25% सीटें गरीब बच्चों के लिए अनिवार्य
अभिभावकों के लिए बड़ी राहत
अब अभिभावक सीधे शिकायत कर सकते हैं:
समाहरणालय, कमरा संख्या 105
व्हाट्सएप नंबर: 9430328080
शिकायत निवारण के लिए नोडल
पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई
₹50,000 से ₹2.5 लाख तक जुर्माना
गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता और RTE सुविधा भी रद्द हो सकती है
बड़ा संदेश
यह कदम निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने, अभिभावकों को राहत देने और शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।