अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर
तथ्यों के अनुसार बात करें तो पाकिस्तान का इसमें काफी बड़ा रोल रहा है, और ईरान ने इसे पूरी तरह नकारा नहीं है।
वर्तमान स्थिति (8 अप्रैल 2026): अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हो गया है। इसमें ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोलने को तैयार है, और आगे की बातचीत इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को होने वाली है। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की: पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर ने दोनों तरफ से बात की। पाकिस्तान ने दो-चरण वाला प्लान (तुरंत सीजफायर + बाद में स्थायी समझौता) तैयार किया, जिसे दोनों पक्षों तक पहुंचाया। ट्रंप ने खुद अपनी पोस्ट में पाकिस्तान का जिक्र किया। अमेरिका, पाकिस्तान और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया (Reuters, BBC, Al Jazeera, Dawn आदि) इस बात को मान रहे हैं कि पाकिस्तान ने back-channel और मध्यस्थता में अहम भूमिका निभाई। कई देशों के लीडर्स ने पाकिस्तान को थैंक्स भी कहा। ईरान ने पहले कुछ प्रस्तावों (खासकर अस्थायी सीजफायर) को reject किया था और permanent end to war + sanctions हटाने की मांग की थी। लेकिन आखिरकार Pakistan-brokered दो हफ्ते के सीजफायर को स्वीकार कर लिया। ईरान के फॉरेन मिनिस्टर ने पाकिस्तान को धन्यवाद भी दिया है। कोई स्पष्ट बयान नहीं मिला जिसमें ईरान ने “पाकिस्तान का कोई योगदान नहीं” कहा हो। उल्टा, पाकिस्तान को कम्युनिकेशन चैनल के तौर पर इस्तेमाल किया गया। पाकिस्तान इसका क्रेडिट ले रहा है क्योंकि उसने वाकई मध्यस्थता की। ट्रंप ने भी इसे acknowledge किया। भारत पर भरोसा रखना स्वाभाविक है, खासकर जब हमारी अपनी सुरक्षा और हित प्राथमिकता हैं। पाकिस्तान हमेशा अपनी डिप्लोमेसी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, लेकिन इस बार तथ्य उसके पक्ष में हैं। सीजफायर हुआ है, पाकिस्तान ने मध्यस्थता की है (अमेरिका और कई रिपोर्ट्स के अनुसार), ईरान ने इसे स्वीकार किया है। यह फ्रजाइल (नाजुक) है, आगे की बातचीत तय करेगी कि कितना टिकता है।
हरबंस सिंह, सलाहकार*
शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब,
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