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आसान कंजर्वेशन रिजर्व के बिल्कुल नजदीक NBWL की मंजूरी न मिलने से दो खनन पट्टे हुए निरस्त

देहरादून- नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की स्थायी समिति ने उत्तराखंड में खनन पट्टों (Mining Leases) को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEF&CC) ने उत्तराखंड के आसन कंजर्वेशन रिजर्व (Asan Conservation Reserve) के पास खनन पट्टों (Mining Leases) के प्रस्तावों को निरस्त (Reject) कर दिया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के उस सख्त आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें संरक्षित क्षेत्रों (Protected Areas) के चारों ओर 1 किलोमीटर के दायरे में सभी प्रकार के खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट और समिति के आदेश का मुख्य आधार:
प्रस्तावों की अस्वीकृति: नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की समिति ने 28 अप्रैल 2023 और उसके बाद के विभिन्न आदेशों को आधार मानते हुए उन खनन प्रस्तावों को रद्द कर दिया है जो की देहरादून के ढालीपुर में आसन कंजर्वेशन रिजर्व की सीमा के बहुत करीब थे। विशेष रूप से प्रस्ताव संख्या WL/UK/MIN/QRY/534889/2025 (~91 मीटर) और WL/UK/MIN/QRY/534906/2025 (~138 मीटर) को पारिस्थितिक जोखिम के कारण खारिज किया गया है।

एक किमी का बफ़र ज़ोन: सुप्रीम कोर्ट की 3-जजों की बेंच (जिसमें जस्टिस बी.आर. गवई शामिल थे) ने नवंबर 2025 में यह स्पष्ट किया कि देश के किसी भी संरक्षित क्षेत्र (Protected Area) के 1 किमी के भीतर खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

दूसरा उत्तराखंड हाई कोर्ट के 2015 के आदेश और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, आसन रिज़र्व के 10 किमी के भीतर किसी भी नई लीज़ के लिए वाइल्डलाइफ क्लियरेंस अनिवार्य है।

मंत्रालय ने पाया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजे गए कई खनन पट्टों की फाइलें आसन कंजर्वेशन रिजर्व की 1 किमी की इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की सीमा के भीतर आ रही थीं। वन्यजीवों और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों को "खतरनाक" (Hazardous) माना गया है।

NBWL की भूमिका: नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की सिफारिश के लिए राज्य सरकार द्वारा भेजे गए खनन पट्टों की इन फाइलों को मंत्रालय ने इसी आधार पर रद्द कर दिया क्योंकि वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 'नो माइनिंग ज़ोन' के नियमों का उल्लंघन कर रही थीं।

NTCA गाइडलाइंस: मंत्रालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे अपने इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) के ड्राफ़्ट को NTCA (National Tiger Conservation Authority) की सलाह के अनुसार रिवाइज़ करें। केवल आसन ही नहीं, बल्कि राजाजी टाइगर रिज़र्व और बेनोग वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के 'डिफ़ॉल्ट ESZ' में आने वाले माइनिंग प्रस्तावों को भी समिति ने नामंजूर कर दिया है।

अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या उत्तराखंड सरकार में बैठे उन जिम्मेदार अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग की जानकारी नहीं थी कि यह 1 किलोमीटर का एरिया बफर जोन में आता है जो संबंधित विभागों में बैठे अधिकारियों ने उत्तराखंड सरकार की ओर से माईनिंग लीस की इन फाइलों को NBWL के लिए इन फाइलों को रिकमेंड किया। क्या ऐसे अधिकारियों को इतने जिम्मेदार पदों पर बिठाये रखा जाना चाहिए जिनको ना हाई कोर्ट की रूलिंग पता है और ना सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग जो सरकार की फजीहत कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते अब यह उनका निजी स्वार्थ है या अज्ञानता?

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