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शिक्षकों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं, सड़क से सदन तक लड़ेगी कांग्रेस: उमंग सिंघार

भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की सेवा शर्तों और नए नियमों को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जो शिक्षक दशकों से राष्ट्र का भविष्य गढ़ रहे हैं, आज सरकार उन्हें अपमान और असुरक्षा की ओर धकेल रही है।
"अनुभव का अपमान कर रही सरकार"
उमंग सिंघार ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 25-30 साल तक निष्ठापूर्वक सेवा देने वाले शिक्षकों से अब दोबारा परीक्षा और "प्रदर्शन मूल्यांकन" के नाम पर उनकी योग्यता को चुनौती दी जा रही है। उन्होंने इसे शिक्षकों के साथ सीधा अन्याय बताते हुए कहा कि ऐसे नियम केवल शिक्षकों के करियर में अस्थिरता पैदा करने के लिए थोपे जा रहे हैं।
भाजपा की नीतियों पर उठाए सवाल
सरकार को आड़े हाथों लेते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा:
"भारतीय जनता पार्टी की नीतियां लगातार समाज के हर महत्वपूर्ण वर्ग की अनदेखी कर रही हैं। चाहे किसान हों, युवा हों या शिक्षक—हर कोई आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। जो शिक्षक देश की नींव तैयार करते हैं, उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर करना भाजपा सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है।"
संघर्ष का ऐलान
कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। सिंघार ने शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि:
सड़क से सदन तक घेराव: शिक्षकों की जायज मांगों को लेकर कांग्रेस सड़क पर प्रदर्शन करेगी और विधानसभा में सरकार से जवाब मांगेगी।
अन्याय के विरुद्ध एकजुटता: हर स्तर पर इस नीति का विरोध किया जाएगा ताकि शिक्षकों का सम्मान और भविष्य सुरक्षित रह सके।
निष्कर्ष: नेता प्रतिपक्ष के इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में शिक्षकों का यह मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा आंदोलन बन सकता है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह शिक्षकों के स्वाभिमान की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

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