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“क्या बंगाल का भविष्य बदलने वाला है? चुनाव से जुड़े बड़े सवाल 🤔”




बंगाल का चुनाव अगर बीजेपी इस बार नही जीत पाया तो भविष्य मे बंगाल... बांग्लादेश जैसे ही एक अलग देश बनने की और अग्रसर हो जायेगा...!!

हाँ सच मे क्योंकि अभी आप इसे एक राज्य मान कर चल रहे हैं मगर बहुत जल्दी ये एक देश की और आगे बढ़ चूका है...!

कारण ये नही की रोहिंग्या से भरा पड़ा ये राज्य बहुत आगे बढ़ चूका है बल्कि कारण ये है की यहां का कानून जो अभी भी भारत के अन्य राज्यों के तरह यहां लागु नही हो पाता इस वजह से ये लिख रहा हूँ...!

कुछ लोग सोशल मीडिया पर भाजपा की खिल्ली उड़ाते हुए लिख रहे हैं कि इस बार भाजपा बंगाल तो हारेगी ही हारेगी..!

तो, भाई... बात ऐसी है कि भाजपा बंगाल हारे या जीते भाजपा को झाँ%$ कोई फर्क नहीं पड़ता है.

क्योंकि, अगर भाजपा बंगाल हारती है तो उसका कुछ नहीं जाना है क्योंकि कौन सा बंगाल में उनकी सत्ता है जो चली जायेगी.

और, अगर जीत गई तो कौन सा मोदी या शाह को बंगाल का मुख्यमंत्री बन जाना है.

हाँ... भाजपा के बंगाल जीतने या हारने से बंगाल के हिंन्दुओ को जरूर फर्क पड़ना है.

जैसे कि, केंद्र में भाजपा के आने से हमें राम मंदिर मिला, आर्टिकल 370 हटा, हज सब्सिडी आदि हटा, देश की सेना मजबूत हुई, आतंकवाद और नक्सली खत्म हुए आदि-आदि.

उसी तरह... भाजपा के यूपी जीतने से हमें योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री मिले, अतीक-मुख्तार और विकास दुबे जैसे गैंगस्टरों से आजादी मिली..

महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षा मिली..

अच्छी सड़क और विकास की परियोजनाएं मिली.

इसके अलावा असम-MP आदि के बारे में जानते ही हैं.

इसके अलावा एक और उदाहरण है कि जब दिल्ली में केजरीवाल के शासनकाल में शाहीन बाग और खिसान आंदोलन आदि हुआ करते थे तो उससे मोदी और शाह को परेशानी होती थी या आम जनता को ??

लेकिन, दिल्ली में सत्ता बदलते ही ये सब आंदोलन-फान्दोलन खत्म हो गए तो इससे आराम मोदी और शाह को है... या, हम और आप जैसे आम जनता को ?

वैसे भी, बंगाल में आज जो बांग्लादेशी और रोहिंग्या का उपद्रव है, कट मनी सिस्टम है... वो मोदी और शाह के लिए है या हम और आप जैसे सामान्य लोगों के लिए ??

इसीलिए, जब कोई ये धमकी देता है कि हम बंगाल हरवा देंगे, यूपी हरवा देंगे या दिल्ली हरवा देंगे तो उसे पढ़कर हँसी आने के साथ-साथ उनकी सोच पर दया भी आती है..

क्योंकि, उनकी ऐसी सोच देखकर मुझे अकबर के दरबारी मानसिंह और जयचंद आदि की याद आने लगती है...

जो अपने समय में यही बोला करते थे कि इस बार तो पृथ्वीराज चौहान को हरवा देंगे काहे कि उसने ऐसा क्यों किया...

अथवा, मानसिंह की वो कुत्सित हंसी याद आती है कि इस बार तो महाराणा प्रताप को इस तरह युद्ध में हरवा देना है.

या फिर, ऐसी भाषा मुझे राजा रतन सिंह के संगीतकार राघव चेतन की याद दिलाती है जो अलाउद्दीन खिलजी से मिलकर रानी पद्मिनी समेत 16000 हिन्दू महिलाओं को जौहर के लिए विवश इसीलिए कर दिया था क्योंकि महाराज रावल रतन सिंह ने उसकी मनमानी पर आपत्ति की थी.

इसीलिए, हमको ये सब मत सुनाया करो कि आप किसको सबक सिखा दोगे और किसको नहीं.

क्योंकि, लोकतंत्र में सबक सत्ताधीश नहीं बल्कि जनता सीखा करती है.

जैसे कि, सपा की सरकार में यूपी की जनता सबक सीखती थी और खांग्रेस के शासन में असम की जनता.

यूपी में हमारे टोंटी भैया के हारने से ही उनका क्या बिगड़ गया ?

हमारे टोंटी भैया तो पहले भी फॉर्च्यूनर और हेलीकॉप्टर पर चलते थे और आज भी चल ही रहे हैं.

उसी तरह मोदी और शाह आज भी SPG प्रोटेक्शन में फॉर्च्यूनर और BMW से चलते हैं और हारने के बाद भी इसी प्रोटेक्शन में और इसी गाड़ी में चलेंगे.

हाँ, सत्ता बदलने के बाद हम और आप भले मोटरसाइकिल से साइकिल पर न आ जाएं...

और, ज्यादा टाँय-टाँय करने पर किसी अंसारी, खान या असलम अथवा जादो के हत्थे न चढ़ जाएँ.

चिंता सिर्फ इस बात की होती है.

लेकिन, इतनी समझ होगी कहाँ से ?

आखिर, हमारे बड़े बुजुर्ग कुछ सोच कर ही तो ये कह गए हैं कि...

जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है.

जय महाकाल...!!!

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