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दुखद समाचार : एक साथ बुझ गए सेवा और समर्पण के दो दीप: डॉ. विश्वनाथ ओझा व डॉ. अलखनिरंजन मिश्रा के निधन से चिकित्सा जगत शोकाकुल

गढ़वा/मेदिनीनगर: सोमवार की शाम चिकित्सा जगत के लिए बेहद दुःखद खबर लेकर आई, जब दो सम्मानित और लोकप्रिय चिकित्सकों—डॉ. विश्वनाथ ओझा एवं डॉ. अलखनिरंजन मिश्रा—का असामयिक निधन हो गया। इस हृदयविदारक घटना से पूरे मेदिनीनगर, गढ़वा समेत झारखंड के चिकित्सा समुदाय में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।डॉ. विश्वनाथ ओझा, जो मेदिनीनगर के एक जाने-माने और सम्मानित चिकित्सक थे, ने वर्षों तक अपनी सेवा, सादगी और मरीजों के प्रति अपनत्व से समाज में एक अलग पहचान बनाई थी। उनके निधन की खबर मिलते ही शहर में शोक का माहौल छा गया। हर कोई उनके सहज स्वभाव और निस्वार्थ सेवा को याद कर भावुक हो उठा। वहीं रांची सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अलखनिरंजन मिश्रा का निधन भी चिकित्सा जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। लगभग 60 वर्षीय डॉ. मिश्रा लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। वे एक कुशल, समर्पित और अत्यंत मिलनसार चिकित्सक के रूप में जाने जाते थे। उनकी सादगी और मधुर व्यवहार ने उन्हें समाज के हर वर्ग में प्रिय बना दिया था।सोमवार को उनका पार्थिव शरीर मझिआंव प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव पृथ्वीपुर लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। नम आंखों से लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पलों को याद किया। वे अपने पीछे एक पुत्र कस्तूभ मिश्र एवं दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।डॉ. मिश्रा का जीवन सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों का प्रतीक रहा। उनके निधन से न केवल परिवार, बल्कि उनके सहयोगियों, मरीजों और पूरे समाज को गहरा आघात पहुंचा है।इस दुखद क्षण में जिले भर के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं सामाजिक संगठनों ने दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दोनों पुण्यात्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें।
👉 सच ही कहा जाए, तो इन दोनों महान चिकित्सकों के जाने से चिकित्सा जगत में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन उनके आदर्श और सेवा भावना आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी

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