लक्ष्मीपुर के ग्राम पंचायतों में 'कागजी' विकास का खेल,रजिस्ट्रेशन अनाज का, काम मशीनों का?
महाराजगंज/लक्ष्मीपुर ।
ग्रामीण विकास के नाम पर सरकारी धन का किस कदर बंदरबांट हो रहा है, इसकी एक ताजा मामला लक्ष्मीपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत खलीकगढ़ में देखने को मिली है।
क्या है पूरा मामला
ग्राम पंचायत खलीकगढ़ द्वारा एक फर्म को 1,78,425 रुपये का भुगतान किया गया है। दिनांक 04 जनवरी 2026 के अनुसार, यह भुगतान वाशर, प्लंजर, कनेक्टिंग रोड और भारी मात्रा में लेबर चार्ज के नाम पर हुआ है। लेकिन जब इस फर्म की गहराई से पड़ताल की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएं।
रजिस्ट्रेशन अनाज का, काम मशीनों का
GST विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, जिस फर्म से पंचायत सामान खरीद रही है, वह मुख्य रूप से स्टेशनरी (कागज-लिफाफे) और अनाज के व्यापार के लिए रजिस्टर्ड है। सवाल यह है कि जो फर्म कागज और अनाज बेचती है, वह पंचायत को पंप के पुर्जे (प्लंजर, बेयरिंग) और निर्माण सामग्री कैसे सप्लाई कर रही है?
GST की 'चोरी' या सरकारी धन की लूट
हैरानी की बात यह है कि करीब 1.80 लाख रुपये के इस बिल में GST का कॉलम खाली है। एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया और पारदर्शी टैक्स व्यवस्था की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ ग्राम पंचायत के सरकारी फंड से बिना टैक्स वाला बिल पास कर दिया गया। क्या सरकारी खजाने को मिलने वाले टैक्स की यहां जानबूझकर चोरी की गई?
लेबर चार्ज के नाम पर भारी भुगतान
बिल में ₹40,000 सिर्फ 'लेबर चार्ज' के नाम पर दिखाए गए हैं। एक रिटेलर फर्म, जो सामान बेच रही है, वह इतना भारी लेबर चार्ज किस आधार पर वसूल रही है? क्या धरातल पर वाकई इतना काम हुआ है?
जांच का विषय
यह मामला सिर्फ एक बिल का नहीं है, बल्कि सरकारी धन की उस कार्यप्रणाली का है जहां नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को भुगतान किया जाता है। बड़ा सवाल ज़िम्मेदारो पर उठ रहा है क्या वह बिल पर साइन मोहर करते जांच नहीं करते है।
इस सम्बन्ध में खण्ड विकास अधिकारी मृत्युंजय यादव ने कहा कि जांच कर कार्रवाई की जायेगी।