अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) पर “धोखाधड़ी” का आरोप
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) पर “धोखाधड़ी” का आरोप काफी समय से चल रहा है और इसमें कुछ सच्चाई भी है। आइए इस पर खुलकर बात करते हैं, न किसी पार्टी का पक्ष लेते हैं और न ही भावनाओं में बहते हैं। अन्ना हजारे केस (2011-12): यह सच है कि केजरीवाल अन्ना हजारे के बहुत करीबी साथी थे। लोकपाल बिल के लिए आंदोलन चल रहा था, लेकिन जब केजरीवाल ने AAP बनाई, तो अन्ना ने इसे लड़ाई छोड़कर सत्ता की ओर बढ़ते हुए देखा। अन्ना ने बाद में इस पर अपनी नाराज़गी भी ज़ाहिर की। कई लोग इसे धोखाधड़ी मानते हैं। पंजाबी नेताओं का केस: सुच्चा सिंह छोटेपुर, सिमरजीत बैंस, सुखपाल खैरा, प्रशांत भूषण जैसे नेता, फूलका और डॉ. गांधी जैसे वकील कभी AAP से जुड़े थे और बाद में बाहर हो गए। उन पर अंदरूनी तानाशाही, एक व्यक्ति का पूरा कंट्रोल और पंजाबी नेताओं को नज़रअंदाज़ करने के आरोप लगे। ये बातें भी लगातार चलती रही हैं। राघव चड्ढा केस (2-5 अप्रैल 2026) AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक मित्तल (पंजाब से राज्यसभा मेंबर और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर) को लाया गया। पार्टी ने राज्यसभा सेक्रेटेरिएट को एक लिखा हुआ लेटर भी भेजा जिसमें कहा गया कि चड्ढा को AAP के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इसके कारण बताए गए थे - पार्टी के मामलों पर चुप्पी, केजरीवाल से जुड़े इवेंट्स में गैरमौजूदगी और अंदरूनी मतभेद। चड्ढा ने बाद में एक वीडियो जारी करके अपनी बात रखी और कहा, "चुप हो गए लेकिन हारे नहीं हैं"। कई लोग इसे "आवाज़ दबाने" की चाल के तौर पर देख रहे हैं। गठबंधन तोड़ना, नेता बदलना और धोखे के आरोप राजनीति में आम बात है - कांग्रेस, BJP, अकाली, SP सभी में ऐसा होता है। लेकिन AAP में एक खास पैटर्न है: कोई भी लीडर जो पॉपुलर हो जाता है, अपनी आवाज़ उठाता है या पार्टी में डेमोक्रेटिक बदलावों की बात करता है, उसे साइडलाइन कर दिया जाता है। इससे पता चलता है कि लीडरशिप एक ही व्यक्ति पर बहुत ज़्यादा फोकस्ड है। AAP खुद को "आम आदमी" की पार्टी के तौर पर दिखाती थी, इसलिए ऐसी चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने फ्री बिजली, पानी, मेडिकल और एजुकेशन जैसी स्कीमें लागू कीं, जिससे आम आदमी को फायदा हुआ। इसीलिए उनकी पॉपुलैरिटी बनी रही। लेकिन पंजाब में, 2022 के चुनाव में किए गए वादों (नौकरियां, किसानों को राहत, वगैरह) से बहुत से लोग निराश हैं, खासकर पंजाबी नेताओं और आम आदमी की बात करने वालों से। यह सब पॉलिटिक्स का खेल है और पंजाब में 2027 में चुनाव आने वाले हैं। लोग देखेंगे कि कौन सच में अपने हक के लिए लड़ रहा है और कौन सिर्फ पॉलिटिक्स खेल रहा है। डेमोक्रेसी में, आखिर में जनता ही चैलेंज करती है और फैसला लेती है। 🙏
🍳*हरबंस सिंह, एडवाइजर*✍️🙏
शहीद भगत सिंह एसोसिएशन पंजाब,
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