कौन हैं IAS पुलकित गर्ग? जिनकी सादगी के मुरीद हुए सीएम योगी, आंगनबाड़ी में बेटी का दाखिला कराकर पेश की मिसाल
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नाम की खूब चर्चा हो रही है— IAS पुलकित गर्ग। आमतौर पर बड़े अधिकारियों के बच्चों का बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना आम बात है, लेकिन पुलकित गर्ग ने अपनी बेटी का दाखिला एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर न केवल समाज को एक संदेश दिया, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल भी जीत लिया।
आइए जानते हैं कौन हैं पुलकित गर्ग और उन्होंने यह मिसाल क्यों पेश की।
कौन हैं IAS पुलकित गर्ग?
पुलकित गर्ग 2016 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। उनकी छवि एक ईमानदार, मेहनती और जमीन से जुड़े अधिकारी की रही है।
शिक्षा: उन्होंने प्रतिष्ठित IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है।
पद: वर्तमान में वह मथुरा के नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह सिद्धार्थनगर में सीडीओ (CDO) के पद पर भी रह चुके हैं।
चर्चा में क्यों आए? (मिसाल की वजह)
IAS पुलकित गर्ग की चर्चा उनकी किसी बड़ी फाइल या कार्रवाई की वजह से नहीं, बल्कि उनकी सादगी की वजह से हो रही है। उन्होंने अपनी तीन साल की बेटी, अद्विका, का एडमिशन किसी महंगे प्री-स्कूल या प्ले-वे स्कूल में कराने के बजाय मथुरा के महोली स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है।
इस कदम के पीछे का उद्देश्य:
सरकारी तंत्र पर भरोसा: वह यह जताना चाहते थे कि सरकारी सुविधाएं और शिक्षा स्तर किसी से कम नहीं है।
आंगनबाड़ी केंद्रों का मनोबल बढ़ाना: जब एक आईएएस अधिकारी का बच्चा वहां पढ़ेगा, तो वहां की व्यवस्थाएं अपने आप दुरुस्त होंगी और अन्य अभिभावकों का भी सरकारी केंद्रों पर विश्वास बढ़ेगा।
समानता का संदेश: समाज में यह संदेश देना कि शिक्षा और विकास के लिए केवल पैसा ही एकमात्र पैमाना नहीं है।
सीएम योगी ने क्यों की तारीफ?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा से उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 'कायाकल्प' योजना के जरिए बेहतर बनाने पर जोर देते रहे हैं। जब उन्हें पुलकित गर्ग के इस कदम की जानकारी मिली, तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से उनकी प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब जिले के आला अधिकारी खुद सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं, तो पूरे सिस्टम का मनोबल बढ़ता है। सीएम योगी ने इसे "सेवा और सादगी का उत्तम उदाहरण" बताया।
सादगी के मुरीद हुए लोग
सोशल मीडिया पर भी पुलकित गर्ग की काफी तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर हर जिले का डीएम, एसपी या नगर आयुक्त अपने बच्चों को सरकारी संस्थानों में भेजना शुरू कर दे, तो देश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी।
पुलकित गर्ग खुद भी समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्र जाकर बच्चों के साथ समय बिताते हैं और व्यवस्थाओं का जायजा लेते हैं। उनका मानना है कि बच्चों को जमीन से जुड़ी शिक्षा देना बेहद जरूरी है।
IAS पुलकित गर्ग ने यह साबित कर दिया है कि एक अधिकारी केवल आदेश देकर ही नहीं, बल्कि खुद के आचरण से भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी यह छोटी सी पहल उत्तर प्रदेश के शिक्षा और बाल विकास विभाग के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।