शमिक ऋषि के अपमान पर मिला था शाप आचार्य जयेश मिश्र
शमिक ऋषि के अपमान पर मिला था शाप
बक्शा। नौपेड़वा बाजार में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की रात्रि कथा सुनाते हुए कथा वाचक आचार्य डॉ. जयेश मिश्र ने कहा कि राजा परीक्षित द्वारा शमिक ऋषि के अपमान पर शाप मिला था। वही शाप कलयुग के प्रभाव में हुआ। उन्होंने कहा कि प्यासे राजा परीक्षित ने ध्यानमग्न ऋषि के गले में मृत सांप डाल दिया था। इस अपमान से क्रोधित होकर ऋषि के पुत्र शृंगी ने राजा को 7 दिन में तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का शाप दिया। इसी घटना से कलयुग का आरंभ माना जाता है। राजा परीक्षित शिकार के दौरान प्यास से व्याकुल थे। ध्यानमग्न ऋषि द्वारा पानी न देने पर, कलयुग के प्रभाव में परीक्षित ने मरे हुए सांप को उनके गले में डाल दिया। शृंगी ऋषि ने श्राप दिया जिसके बाद परीक्षित ने पश्चाताप किया और सुखदेव मुनि से श्रीमद्भागवत कथा श्रवण प्रारंभ किया। आचार्य ने कहा कि कलि को रहने के लिए पाँच स्थान देने के बाद राजा परक्षित प्रजा पालन करने लगे। उन्होंने कहा कि यह कलि का ही प्रभाव था कि राजा परीक्षित जैसे राजर्षि के मन में भी क्रोध, मान का भावना उत्पन्न हुआ। ब्रह्मर्षि शमीक ने राजा के शाप की बात सुनकर अपने पुत्र के कार्य को अच्छा नहीं माना। उन्होंने कहा कि भगवान के भक्तों में भी बदला लेने की शक्ति होती है, परंतु वे दूसरों के द्वारा किए हुए अपमान, धोखेबाजी, गाली-गलौज, आक्षेप और मार-पीट का कोई बदला नहीं लेते। महामुनि शमिक को पुत्र के अपराध पर बड़ा पश्चाताप हुआ।