परिसीमन पर सिद्धारमैया का केंद्र पर तीखा वार, बोले— दक्षिणी राज्यों के साथ नहीं होना चाहिए अन्याय
बेंगलुरु, 05 अप्रैल। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि इससे दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ अन्याय होने की आशंका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि दक्षिणी राज्यों के प्रति अचानक दिखाई गई चिंता वास्तविक कम और राजनीतिक रणनीति अधिक लगती है। उनके अनुसार, यह बयान केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चल रहे चुनावी माहौल को ध्यान में रखकर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि असली मुद्दा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि सीटों के वितरण का तरीका है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित विस्तार से उत्तर भारत के बड़े राज्यों— जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार— को अधिक लाभ मिल सकता है, जबकि कर्नाटक सहित दक्षिणी राज्यों को सीमित बढ़ोतरी ही मिलेगी।
सिद्धारमैया ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यदि लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 816 भी हो जाती है, तब भी दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 24 प्रतिशत के आसपास ही रह सकती है। उन्होंने इसे जनसंख्या नियंत्रण, विकास और सुशासन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के साथ अन्याय बताया।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बड़े राज्यों के संख्यात्मक प्रभुत्व को बढ़ाकर कर्नाटक जैसे राज्यों की आवाज को कमजोर कर सकती है। उनके मुताबिक, यह सहकारी संघवाद के बजाय सत्ता के केंद्रीकरण का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्यों के साथ व्यापक सार्वजनिक चर्चा और विचार-विमर्श के बिना ऐसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव लागू करना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र से न्याय, पारदर्शिता और संघीय ढांचे की मूल भावना की रक्षा करने की अपील की।
अंत में सिद्धारमैया ने चेतावनी दी कि कर्नाटक के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का राज्य सरकार कड़ा विरोध करेगी।