लक्ष्मीपुर में 'कागजी' फर्मों का मायाजाल, विकास के नाम पर 'बिल-वाउचर' का बड़ा खेल
स्टेशनरी और अनाज के नाम पर GST नंबर, और ग्राम पंचायतों को बेच रहे 'एंटी-लार्वा' व 'ठेला मरम्मत' की सेवा
महराजगंज (लक्ष्मीपुर)।
लक्ष्मीपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में सरकारी धन की निकासी के लिए नियमों को ताक पर रखकर 'अनोखा' खेल चल रहा है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए गए बिलों की पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो पंचायती राज व्यवस्था और GST विभाग की आंखों में धूल झोंकने की तस्दीक कर रहे हैं। मामला ग्राम पंचायत सिंहपुर थरौली की एक फर्म से जुड़ा है, जिनके बिलों और आधिकारिक रजिस्ट्रेशन में जमीन-आसमान का अंतर है।
'सर्व-गुण संपन्न' दुकानें
पड़ताल में सामने आया कि फर्म का जीएसटी रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर मुख्य रूप से स्टेशनरी, लिफाफे और अनाज के व्यापार के लिए है। लेकिन ग्राम पंचायत को दिए गए बिलों में यह फर्म 'एंटी-लार्वा दवा', 'चूना' और यहाँ तक कि ठेला मरम्मत तक की सेवाएं भी दे रही है। सवाल यह है कि क्या एक स्टेशनरी और अनाज बेचने वाली दुकान के पास कीटनाशक बेचने का ड्रग लाइसेंस और ठेला मरम्मत करने की तकनीक मौजूद है?
लक्ष्मीपुर की ग्राम पंचायतों में 'रेगुलर' GST फर्मों द्वारा बिना टैक्स वाले 'कैश मेमो' पर लाखों का भुगतान लिया जा रहा है। पोर्टल पर रजिस्टर्ड होने के बावजूद, बिलों से GST गायब है।इसका मतलब है कि या तो यह कच्चा बिल है जिसे सरकारी रिकॉर्ड में 'पक्का' बनाकर पेश किया गया है, या फिर सीधे तौर पर सरकारी राजस्व की चोरी की गई है।
भ्रष्टाचार छिपाने के लिए अस्पष्ट बिल
भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ज़िम्मेदार द्वारा पोर्टल पर बिल को अस्पष्ट अपलोड किया गया है जिसमें लिखा समाग्री साफ स्पष्ट नहीं हो रहा है। क्या ये कोई टेक्निकल गलती है या जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है जिससे भ्रष्टाचार का खेल का खुलासा न हो सके।
सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार आंख मूंदकर बिल पर साइन मोहर करते हैं,या इन बिलों की जांच करना गैरजरूरी समझते हैं। कहीं न कहीं जिम्मेदारो की भी भूमिका इसमें संदिग्ध लग रही हैं। अब देखना लाजमी होगा कि मामला संज्ञान में आने पर अधिकारी इस पर कार्रवाई करेंगे या वह भी आंख मूंद लेंगे।
इस सम्बन्ध में खण्ड विकास अधिकारी मृत्युंजय यादव ने कहा कि जांच कर कार्रवाई की जायेगी।