धनबाद | बेलगड़िया पुनर्वास योजना पर कानूनी अड़चन, मामला पीएमओ तक पहुंचा
धनबाद के बेलगड़िया पुनर्वास योजना से जुड़ा मामला अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गया है। विस्थापित परिवारों को जमीन और आवास का मालिकाना हक देने में कानूनी बाधाएं सामने आने से योजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
दरअसल, बीसीसीएल के लिए अधिग्रहीत जमीन का अब तक कंपनी के नाम विधिवत म्यूटेशन नहीं हो सका है। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कंपनी जमीन को झारखंड पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण (JRDA) को हस्तांतरित नहीं कर पाएगी। इसका सीधा असर अग्नि और भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों के हजारों परिवारों के पुनर्वास पर पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि जिन परिवारों को पहले ही शिफ्ट किया जा चुका है, उन्हें अब तक जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है। वहीं, जिनके लिए आवास तैयार किए जा रहे हैं, उनकी शिफ्टिंग भी कानूनी पेच में फंस सकती है।
बेलगड़िया पुनर्वास योजना के तहत कुल 18,272 आवास बनाए जाने हैं, जिसे आठ चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण में 13,301 परिवारों को लाभ मिलना प्रस्तावित है। अब तक 2,855 परिवारों को विस्थापित कर बसाया जा चुका है, जबकि करीब 6,300 आवास आवंटन के लिए तैयार हैं।
प्रशासन ने वर्ष 2028 तक लगभग 15,080 परिवारों के पुनर्वास का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 1,130 रैयत और 649 बीसीसीएल कर्मचारी शामिल हैं।
योजना के तहत JRDA द्वारा निर्मित क्वार्टरों को गैर-टाइटल होल्डर्स को 99 वर्षों के लीज पर देने का प्रस्ताव है। यह निर्णय उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता से प्राप्त कानूनी राय के आधार पर लिया गया था।
अब म्यूटेशन प्रक्रिया में देरी के कारण पूरा पुनर्वास मॉडल प्रभावित हो रहा है, जिससे हजारों परिवारों का भविष्य अनिश्चितता में लटक गया है। पीएमओ तक मामला पहुंचने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस जटिल समस्या का समाधान निकलेगा