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दिल का बसेरा – अध्याय 4 (कहानी) शेख जमीरुल हक खान चौधरी



अध्याय 4



शाम का वही वक्त…

वही हल्की ठंडी हवा…

लेकिन आज उसके दिल की धड़कन कुछ ज़्यादा ही तेज थी।

क्योंकि अब यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं रही थी…

यह एक इंतज़ार बन चुका था।



💭 दिन भर का बेचैन दिल

सुबह से ही उसका मन कहीं खोया हुआ था।

वह काम तो कर रही थी…

लेकिन हर कुछ मिनट में ख्याल वहीं चला जाता—

उसकी मुस्कान… उसकी आवाज़…

माँ ने फिर टोका—

“आजकल तुम बहुत खोई-खोई रहती हो…”

वह हल्का-सा मुस्कुराकर बोली—

“ऐसा कुछ नहीं है…”

लेकिन दिल की बात अब छुपाना मुश्किल हो रहा था।



🌇 शाम – एक खास पल

जैसे ही सूरज ढलने लगा…

वह जल्दी से छत पर पहुंच गई।

आज उसके कदमों में एक अजीब-सी जल्दी थी…

जैसे दिल पहले ही वहां पहुंच चुका हो।

उसने इधर-उधर देखा…

और फिर—

वह दिख गया।



👤 नाम का राज खुला

आज वह पहले से ज्यादा करीब आया।

कुछ पल की खामोशी के बाद उसने मुस्कुराकर कहा—

“वैसे… मैं आर्यन हूँ।”

उसका दिल जोर से धड़का।

उसने हल्की-सी नजर उठाई…

और धीरे से कहा—

“मैं… सना।”

पहली बार… दोनों ने एक-दूसरे का नाम जाना।

और उस छोटे-से पल में…

रिश्ता थोड़ा और गहरा हो गया।



💬 बातों का सिलसिला

अब बातें थोड़ा खुलकर होने लगीं—

“तुम पढ़ाई करती हो?”

“हाँ… और तुम?”

“मैं यहाँ नया आया हूँ…”

“अच्छा…”

छोटी-छोटी बातें…

लेकिन हर शब्द में एक अलग ही एहसास था।

दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहें…

लेकिन फिर भी, चुप रहना अब अच्छा नहीं लग रहा था।



💓 दिल का एहसास बढ़ता हुआ

हवा तेज चलने लगी…

उसके बाल चेहरे पर आ गए।

आर्यन ने बस उसे देखा…

और वह झट से नजरें झुका गई।

दिल की धड़कन अब साफ सुनाई दे रही थी।

यह सिर्फ दोस्ती नहीं लग रही थी…

कुछ और था… कुछ गहरा…



⚡ अचानक एक मोड़

तभी नीचे से आवाज़ आई—

“सना… कहाँ हो तुम?”

वह घबरा गई—

“मुझे जाना होगा…”

आर्यन ने हल्के से सिर हिलाया—

“ठीक है… फिर मिलते हैं…”

उसकी आवाज़ में एक अपनापन था।



🌙 रात – मुस्कान और डर

वह जल्दी से नीचे आ गई…

लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

आज उसने उसका नाम जाना…

उससे बात की…

और दिल में एक अजीब-सी खुशी थी।

लेकिन साथ ही…

एक हल्का-सा डर भी—

“क्या ये सब सही है…?”



😄 प्यार की शुरुआत

आज उनकी कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया था—

अब वो अनजान नहीं रहे

अब नाम, बातें और एहसास जुड़ चुके थे

दिल में एक हल्की-सी आवाज़ आई—

“शायद… यही मेरा दिल का बसेरा है…”

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