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दिल का बसेरा – अध्याय 2 (कहानी) शेख जमीरुल हक खान चौधरी

अध्याय 2



रात बीत चुकी थी…

लेकिन उसकी आँखों में अब भी नींद नहीं थी।

वह बिस्तर पर लेटी हुई छत को देख रही थी।

कल शाम का वो पल बार-बार उसकी आँखों के सामने आ रहा था—

वही अनजान चेहरा… वही कुछ सेकंड की मुलाकात…

“आखिर वो था कौन…?”

उसने धीरे से खुद से पूछा।

दिल में एक अजीब-सी हलचल थी, जिसे वह समझ नहीं पा रही थी।



🌅 नई सुबह, नया एहसास

सुबह की किरणें फिर से कमरे में दाखिल हुईं।

लेकिन आज कुछ अलग था।

वह उठी, आईने के सामने खड़ी हुई…

और खुद को देखने लगी।

जैसे पहली बार उसने खुद को गौर से देखा हो।

“मुझे क्या हो रहा है…?”

वह हल्का-सा मुस्कुराई… और फिर खुद ही शरमा गई।



🏠 घर का वही माहौल, लेकिन दिल बदला हुआ

घर में सब कुछ पहले जैसा ही था—

माँ रसोई में व्यस्त,

पिता अपने काम में उलझे हुए…

लेकिन आज उसे सब कुछ थोड़ा हल्का लग रहा था।

वह काम तो कर रही थी, लेकिन आज उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी।

जैसे दिल के अंदर कोई छोटा-सा राज छिपा हो।

माँ ने गौर किया और पूछा—

“आज बड़ी खुश लग रही हो… बात क्या है?”

वह चौंक गई—

“नहीं तो… कुछ भी तो नहीं…”

लेकिन दिल की बात आँखों में साफ झलक रही थी।



💭 दिल की उलझन

काम करते-करते उसका ध्यान बार-बार भटक जाता।

हर बार वही चेहरा सामने आ जाता—

वो नजरें… वो एहसास…

“क्या वो मुझे फिर से दिखेगा…?”

यह सवाल उसके दिल में बार-बार उठ रहा था।

वह खुद से लड़ रही थी—

“ये सब क्या है? मैं उसे जानती भी नहीं…”

लेकिन दिल मानने को तैयार ही नहीं था।



🌇 फिर वही जगह, वही इंतज़ार

शाम होने लगी।

आज वह खुद को रोक नहीं पाई…

वह फिर से उसी जगह आ गई—छत पर।

हवा हल्की-हल्की चल रही थी।

आसमान का रंग बदल रहा था…

और उसका दिल…

तेज़-तेज़ धड़क रहा था।

जैसे किसी का इंतज़ार कर रहा हो।



👤 फिर से मुलाकात

अचानक…

वह दिखा।

वही लड़का…

वही चेहरा…

इस बार वह थोड़ा करीब था।

उनकी नजरें फिर से मिलीं—

लेकिन इस बार कुछ सेकंड ज्यादा देर तक।

उसने महसूस किया—

जैसे समय रुक गया हो।

लड़का हल्का-सा मुस्कुराया…

और उसका दिल जैसे धड़कना भूल गया।

वह घबरा गई, नजरें झुका ली…

लेकिन अब सब कुछ बदल चुका था।



💓 दिल की शुरुआत

वह जल्दी से नीचे आ गई, लेकिन उसका दिल अब भी वहीं था।

उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान थी…

और आँखों में चमक।

“क्या ये… प्यार है?”

उसने खुद से पूछा।

लेकिन जवाब उसके पास नहीं था…



🌙एक नयी शुरुआत
रात को वह फिर से अपने कमरे में थी।

लेकिन आज तन्हाई नहीं थी…

आज उसके साथ एक एहसास था।

एक नई उम्मीद…

एक अनजाना रिश्ता…

उसने आँखें बंद कीं और दिल से एक आवाज़ आई—

“शायद… मेरा बसेरा अब बनना शुरू हो गया है…”

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