Relieving letter:
एक वरिष्ठ बैज्ञानिक अधिकारी, जब अपना नौकरी वॉलंटरी (voluntary) retirement। लेके आता है , कुछ दिन उपरान्त एक दूसरी सरकारी संस्थान में नौकरी मिल जाता है।
ए कहानी ,२००६, केई बात है।
यही समय, ५वीं सीपीसी CPC लागू होता था।। वह आदमी को बिना पद बताएं, सीधा नौकरी में लगा दिया जाता है।
जब उसको तनख़ा का बारेमे पता चलतार हैं, वह दूसरा ऊंची तनखा के लिए शासन अधिकारी के पास जातर है, उसको ऊंची तनखा देने केलिए मना कर देते हैं!
तभी, वह अवसर प्राप्त वरिष्ठ बैज्ञानिक अधिकारी, इस्तीफा देके आ जाता है।
आज २०२६, अभितक उसका relieving letter नहीं मिला है।
काल , एक चिट्ठी आया कि, वह अवसर प्राप्त वरिष्ठ बैज्ञानिक अधिकारी को झूठा साबित करके, बोला जाता है कि , आपने कभी उसी संस्था में नौकरी करने के लिए आए नहीं थे!
उसका पूर्ण विवरण मै लेके आऊंगा!
यह एक सच्ची घटना है।
अभी भी , दरखास्त प्रधान मंत्री को। दिया गया है। संस्था के सरकारी अधिकारी यों भी को दिया है।
कान्हू