👉🏻बड़ौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ,बीएमओ के अप-डाउन से, मुख्यालय पर उपस्थित न रहने पर उठ रहे सवाल
✍🏻श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों व्यवस्थागत खामियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण चर्चा में आ रहा है। यहां पदस्थ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को पदस्थ हुए लगभग 12 माह पूर्ण होने को हैं, लेकिन इसके बावजूद वे नियमित रूप से मुख्यालय बड़ौदा में निवासरत न कर श्योपुर से अप-डाउन करते आ रहे हैं। इस स्थिति को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
उनका का कहना है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का अपने कार्यस्थल मुख्यालय पर उपस्थित न रहना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। बीएमओ जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी की अनुपस्थिति का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। खासतौर पर रात्रिकालीन आपातकालीन सेवाओं के दौरान मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित शासकीय आवास पर अक्सर ताला लगा रहता है, जिससे स्पष्ट होता है कि अधिकारी मुख्यालय पर निवास नहीं कर रहे हैं। ऐसे में यदि रात के समय कोई गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचता है, तो उसे समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पाता। कई बार मरीजों को रेफर करने या प्राथमिक उपचार में भी देरी हो जाती है, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
इसके अलावा अस्पताल के अन्य स्टाफ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि कुछ कर्मचारी ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतते हैं, वहीं कुछ मामलों में नशे का सेवन कर ड्यूटी करने जैसी शिकायतें भी सामने आई हुई हैं। इस तरह की अनियमितताओं के कारण स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और आमजन का भरोसा भी कमजोर पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में इस प्रकार की ढिलाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि बीएमओ के अप-डाउन पर तत्काल रोक लगाई जाए और उन्हें मुख्यालय पर अनिवार्य रूप से निवास करने के निर्देश दिए जाएं। साथ ही अस्पताल स्टाफ की नियमित निगरानी कर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
नागरिकों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम उठाए ।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को किस तरह लेता है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल बड़ौदा क्षेत्र के मरीज भगवान भरोसे एवं बेहतर और जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं।