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बैंकों के अनुसार सिक्के पूरी तरह से वैध मुद्रा, इनके लेन-देन से मना करना नियमों के खिलाफ है।

*बैंकों के अनुसार सिक्के पूरी तरह से वैध मुद्रा, इनके लेनदेन से मना करना नियमों के खिलाफ है*
*खैरथल में दुकानदार से लेकर वेंडर तक नहीं ले रहे 10 रुपए का सिक्का, आमजन परेशान*
खैरथल / हीरालाल भूरानी
शहर में 10 रुपए के सिक्कों को लेकर अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। वैध सिक्कों पर खैरथल के स्थानीय बाजार ने अघोषित प्रतिबंध लगा दिया है। हालात ये हैं कि ऑटो चालक, बस कंडक्टर, पेट्रोल पंप, चाय की थड़ी और सब्जी विक्रेता तक 10 का सिक्का देखते ही हाथ खड़े कर देते हैं। इस अवैध पाबंदी के कारण आम जनता के पास जमा सिक्के महज शो-पीस बनकर रह गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि यही सिक्के जयपुर और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में आसानी से स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन खैरथल जिले के कस्बों और गांवों में इन्हें चलन से बाहर कर दिया गया है। स्थानीय निवासी संदीप और नितिन अग्रवाल ने बताया कि वे इन सिक्कों को जयपुर जाकर खर्च करते हैं, क्योंकि अपने ही शहर में इनकी कोई कीमत नहीं बची है। वहीं किराना व्यापारी मुकेश शर्मा और सब्जी विक्रेता ओमप्रकाश का तर्क है कि जब आगे कोई लेता ही नहीं, तो वे क्यों लें। इसी चेन ने बाजार में सिक्कों का रोटेशन पूरी तरह ठप्प कर दिया है।
बैंक अधिकारियों के अनुसार, आरबीआई के सिक्का अधिनियम 2011 के तहत 10 रुपए के सभी सिक्के पूरी तरह वैध हैं। नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति 1000 रुपए तक के भुगतान में सिक्के लेने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। रिजर्व बैंक ने बैंकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कितनी भी संख्या में सिक्के जमा करें, इसकी कोई सीमा तय नहीं है।
*सिक्कों को लेकर फैल रहे भ्रम और मनमानी पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन ने आमजन को सलाह दी है कि यदि कोई दुकानदार या व्यापारी सिक्का लेने से इनकार करता है, तो उसका वीडियो बनाकर जिला प्रशासन को भेजें। शिकायत सही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाएंगे।*
*इनका कहना है --*
इस संबंध में भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा खैरथल के उप प्रबंधक मेध सिंह बारैठ ने बताया कि सिक्के पूरी तरह से वैध मुद्रा है और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए हैं। इनके लेनदेन से मना करना नियमों के खिलाफ है। बाजार में कुछ भ्रांतियों के कारण व्यापारी एवं दुकानदार इन सिक्कों को लेने से बचते हैं, जबकि ऐसा करना उचित नहीं है। सभी को चाहिए कि 10 रुपये के सिक्के को बिना संकोच के स्वीकार करे। बैंकों में इन सिक्कों का लेनदेन नियमित रूप से किया जाता है।

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