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जालौन स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल एक पर तुरंत कार्रवाई 18 साल से जमे प्रेम नारायण फार्मासिस्ट पर खामोशी क्यों

भीम राजावत

जालौन जनपद के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है आरोप है कि विभाग में कार्रवाई को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं, जहां एक ओर शिकायत मिलते ही एक डॉक्टर पर तुरंत कार्रवाई कर दी गई, वहीं दूसरी ओर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया

शिकायतकर्ता का कहना है कि अपर सीएमओ डॉ. अरविंद भूषण का रवैया निष्पक्ष नहीं दिख रहा है उनका आरोप है कि एक गरीब डॉक्टर के खिलाफ शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की गई, जबकि लंबे समय से जमे कर्मचारियों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है

मामले का सबसे गंभीर पहलू जालौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र CHC से जुड़ा है, जहां फार्मासिस्ट प्रेम नारायण पिछले करीब 18 वर्षों से कार्यरत बताए जा रहे हैं। जबकि शासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर तैनात नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद, इस मामले में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है

बताया जा रहा है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं दूसरी ओर, अन्य मामलों में त्वरित कार्रवाई ने विभागीय निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए है

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित मामले में सीएमओ स्तर से लेकर निदेशक स्तर तक संरक्षण दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आदेशों की भी अनदेखी किए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचने के बावजूद उनका निस्तारण औपचारिक रूप से कर दिया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों का पालन करना है, तो सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल चुनिंदा मामलों में ही तेजी दिखाना और बाकी मामलों को अनदेखा करना, विभाग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा

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