'धुरंधर' और ₹1,600 करोड़ का नोट घोटाला: क्या है इसकी पूरी सच्चाई?
आजकल सोशल मीडिया पर फिल्म 'धुरंधर' के कुछ दृश्य और दावे तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि फिल्म के एक सीन ने कांग्रेस शासन के दौरान हुए ₹1,600 करोड़ के नोट घोटाले की परतों को खोल दिया है। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा है, बल्कि सीधे तौर पर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है।
क्या है ₹1,600 करोड़ का कथित करेंसी घोटाला?
यह मामला मुख्य रूप से पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम और ब्रिटिश कंपनी De La Rue के बीच हुए एक समझौते के इर्द-गिर्द घूमता है।
सीबीआई (CBI) की एफआईआर के अनुसार, साल 2004 में भारत सरकार ने नोटों में इस्तेमाल होने वाले 'कलर शिफ्ट सिक्योरिटी थ्रेड' (रंगीन सुरक्षा धागा) की आपूर्ति के लिए ब्रिटिश कंपनी 'De La Rue' के साथ 5 साल का अनुबंध किया था। आरोप है कि अरविंद मायाराम ने नियमों को ताक पर रखकर इस अनुबंध को बार-बार विस्तार (Extension) दिया, जबकि उस समय देश में अन्य विकल्प मौजूद थे।
मुख्य विवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि जिस कंपनी (De La Rue) को भारत के नोट छापने का सामान मुहैया कराने का ठेका दिया गया, वही कंपनी पाकिस्तान की करेंसी के लिए भी काम कर रही थी।
सुरक्षा में चूक: जानकारों का मानना है कि एक ही कंपनी द्वारा दोनों देशों की मुद्रा के लिए सुरक्षा धागा बनाने से भारतीय नोटों के नकली वर्जन बनाना आसान हो गया था।
सुरक्षा मंजूरी का अभाव: सीबीआई का दावा है कि मायाराम ने गृह मंत्रालय की आवश्यक सुरक्षा मंजूरी के बिना ही कंपनी को कार्य विस्तार दिया।
फिल्म 'धुरंधर' का प्रभाव
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में फिल्म 'धुरंधर' का उल्लेख है। यह फिल्म एक थ्रिलर है जो नकली नोटों के व्यापार और सिस्टम में बैठे उन 'धुरंधरों' पर चोट करती है जो निजी फायदे के लिए देश की अर्थव्यवस्था से समझौता करते हैं। फिल्म के माध्यम से जनता को यह समझाने की कोशिश की गई है कि कैसे एक प्रशासनिक निर्णय देश की आर्थिक जड़ों को खोखला कर सकता है।
कानूनी कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
जनवरी 2023 में सीबीआई ने इस मामले में औपचारिक रूप से अरविंद मायाराम के खिलाफ भ्रष्टाचार और साजिश का मामला दर्ज किया। उनके दिल्ली और जयपुर स्थित ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस घोटाले के कारण सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और विदेशी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।