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ऊर्जा बचत के लिए प्रतिबद्धता के माध्यम से ही सामुदायिक विकास संभव है जिला -पंचायत अध्यक्ष आरती गुर्जर

ऊर्जा बचत के लिए प्रतिबद्धता के माध्यम से ही सामुदायिक विकास संभव है – जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आरती गुर्जर

ऊर्जा बचत के लिए प्रतिबद्धता के माध्यम से ही सामुदायिक विकास संभव है, क्योंकि ऊर्जा आज हमारे जीवन का एक प्रमुख और आवश्यक अंग बन चुकी है। यह विचार जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आरती गुर्जर ने ‘सुजागृति’ संस्था एवं मध्यप्रदेश जैव विविधता बोर्ड, भोपाल द्वारा ‘मिशन लाइफ’ के अंतर्गत आयोजित जन-जागरूकता कार्यक्रम में व्यक्त किए।
यह एक दिवसीय कार्यशाला ऊर्जा बचत एवं औषधीय उद्यान विषय पर आयोजित की गई, जो कृषि विज्ञान केंद्र, मुरैना में संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड, भोपाल तथा सुजागृति समाजसेवी संस्था, मुरैना के सहयोग से जैव विविधता प्रबंधन समिति लांगुयाया द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी ऊर्जा संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा आमजन में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। समाजसेवी संस्थाओं, जैव विविधता प्रबंधन समितियों एवं शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थानीय समुदाय को जोड़कर ऊर्जा बचत तथा औषधीय पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कार्य किया जा रहा है।
श्रीमती गुर्जर ने कहा कि “जल है तो वन है और वन है तो जीवन है, यही हमारा सबसे बड़ा धन है।” उन्होंने अपने फार्म में लगे पौधों के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं, विशेष रूप से जब इसमें शिक्षक और प्राचार्य जैसे प्रतिभागी शामिल हों, क्योंकि शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं।
जनपद पंचायत मुरैना के अध्यक्ष श्री मोहर सिंह कंषाना ने ऊर्जा संरक्षण पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वे 4 एकड़ भूमि में औषधीय पौधों का रोपण करेंगे।
जनपद पंचायत अंबाह की अध्यक्ष कुमारी मधुरिमा सिंह तोमर ने जलस्तर में गिरावट और सूखते तालाबों-नदियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेड़-पौधों का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।
आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. संदीप तोमर ने ऊर्जा संरक्षण एवं पौधों के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला। डॉ. गुप्ता ने बताया कि पेड़ ही प्रदूषण को नियंत्रित कर हमें विभिन्न बीमारियों से बचाते हैं, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने चंबल क्षेत्र के पारंपरिक औषधीय पौधों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक सदस्य श्रीमती समीम खान द्वारा 25 विद्यालयों में स्थापित औषधीय उद्यानों की समीक्षा की गई। जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री राजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा बचत और औषधीय पौधों के संरक्षण के माध्यम से सामुदायिक विकास को गति दी जा सकती है।
उन्होंने जैव विविधता के संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण चेन्नई में स्थित है तथा राज्य स्तर पर जैव विविधता बोर्ड भोपाल में कार्यरत है। साथ ही पंचायती राज संस्थाओं के तीनों स्तरों पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों की भूमिका भी स्पष्ट की।
कार्यक्रम का संचालन संस्था अध्यक्ष श्री जाकिर हुसैन द्वारा किया गया तथा समन्वय एवं निर्देशन श्री तौफीक हुसैन ने किया। इस अवसर पर श्री कन्हैया सिंह गुर्जर, केशव सिंह राणा, श्री रामवीर सिंह तोमर एवं डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने भी अपने उद्यानों के बारे में जानकारी साझा की। कार्यक्रम में लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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