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रातभर गूंजा भक्ति का स्वर, करगा शोभायात्रा दोपहर तक लौटी मंदिर—भव्य आस्था का नजारा

बेंगलुरु (दलपतसिंह भायल ) शहर के ऐतिहासिक धर्मराजा स्वामी मंदिर से जुड़े विश्व प्रसिद्ध बेंगलुरु करगा महोत्सव के तहत 1 अप्रैल की रात्रि को भव्य और पारंपरिक करगा शोभायात्रा श्रद्धा एवं उत्साह के साथ निकाली गई। इस दौरान पूरे शहर में भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
रात्रि में प्रारंभ हुई इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में पुजारी ने सिर पर फूलों से सुसज्जित पवित्र “करगा” धारण कर परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ यात्रा शुरू की। मान्यता है कि यह करगा द्रौपदी की शक्ति का प्रतीक होता है। जैसे ही करगा मंदिर से बाहर निकला, श्रद्धालुओं ने “गोविंदा” और “द्रौपदी अम्मा” के जयकारों के साथ माहौल को भक्तिमय बना दिया।
यह शोभायात्रा पूरी रात बेंगलुरु के विभिन्न प्रमुख मार्गों, बाजारों और इलाकों से होकर गुजरी, जहां जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा करगा का भव्य स्वागत किया गया। घरों, दुकानों और सड़कों को रोशनी और फूलों से सजाया गया था। कई स्थानों पर भक्तों ने आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया।
इस आयोजन में थिगला समुदाय की विशेष भूमिका रही, जो सदियों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित समुदाय के सदस्य शोभायात्रा के साथ चलते हुए धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते नजर आए।
करगा शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे मार्ग पर तैनात रही, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।
रातभर शहर का भ्रमण करने के बाद यह भव्य शोभायात्रा 2 अप्रैल की दोपहर तक पुनः धर्मराजा स्वामी मंदिर पहुंची, जहां धार्मिक विधि-विधान के साथ करगा का समापन किया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
बेंगलुरु करगा महोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है, जो हर वर्ष हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता

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