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मंहगी किताबों पर जिला प्रशासन का शिकंजा, एनसीईआरटी अनिवार्य—स्कूलों की मनमानी पर लगेगा ब्रेक

छात्र-हित में बड़ा फैसला, अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाले विद्यालयों पर होगी कड़ी कार्रवाई
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अलीगढ़ 30 मार्च 2026 जिले में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, किफायती और छात्र-हितैषी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंहगी और अनावश्यक किताबों की खरीद पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। अब निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. पूरन सिंह ने एडीआईओएस और सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि पाठ्य पुस्तकों के चयन में शासन द्वारा निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।

जिलाधिकारी संजीव रंजन ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्थिति में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कक्षा 1 से 12 तक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तकों को ही मुख्य पाठ्य सामग्री के रूप में अपनाया जाए। साथ ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के दिशा-निर्देशों का भी पालन सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विद्यालय द्वारा छात्रों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। साथ ही विद्यालयों और प्रकाशकों के बीच किसी भी प्रकार की कमीशन आधारित व्यवस्था को सख्ती से रोका जाएगा।

जिलाधिकारी ने डीआईओएस को निर्देश दिए हैं कि सभी निजी और सहायता प्राप्त विद्यालयों की जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जा रही है। अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

वहीं डीआईओएस ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा जबरन महंगी किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है तो इसकी शिकायत तुरंत विभाग को दें।

प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, न कि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना।

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