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“घराट बचाओ, विरासत बचाओ” अभियान की शुरुआत, सरकार से संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग: धीरज रमौल

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक जलचालित आटा चक्कियां, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘घराट’ कहा जाता है, आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रयास सोसाइटी ने “घराट बचाओ, विरासत बचाओ” अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने जारी बयान में कहा कि घराट केवल अनाज पिसने का साधन नहीं, बल्कि पहाड़ी समाज की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। पहले समय में नदी-नालों के किनारे स्थापित ये घराट स्थानीय लोगों की दैनिक जरूरतों को पूरा करते थे, जहां मक्की, गेहूं, जौ और मंडुवा जैसे अनाज पिसे जाते थे।
उन्होंने बताया कि घराट में धीमी गति से होने वाली पिसाई से आटे की गुणवत्ता बेहतर रहती है और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। साथ ही यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल प्रणाली है, जो जल-ऊर्जा पर आधारित होने के कारण किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाती।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से घराट का आटा बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। घराट में पिसा आटा प्राकृतिक तरीके से तैयार होता है, जिसमें पोषक तत्व, फाइबर और स्वाद बरकरार रहता है। यह आधुनिक तेज गति वाली मशीनों से पिसे आटे की तुलना में अधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है, जिससे लोगों की सेहत को भी लाभ मिलता है।
धीरज रमौल ने चिंता जताते हुए कहा कि आधुनिक मशीनों के बढ़ते उपयोग, रखरखाव की कमी, जलस्रोतों के क्षरण और जागरूकता के अभाव के कारण सैकड़ों घराट बंद हो चुके हैं। यदि समय रहते इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस समृद्ध परंपरा को केवल इतिहास में ही देख पाएंगी।
प्रयास सोसाइटी ने सरकार, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से सहयोग की अपील करते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। इनमें बंद पड़े घराटों का पुनरुद्धार, पारंपरिक तकनीक के संरक्षण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम, घराट के आटे की ब्रांडिंग, ग्रामीण पर्यटन से जोड़ना और जन-जागरूकता अभियान चलाना शामिल है।
संस्था ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान में सरकार द्वारा इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इस ओर गंभीरता से ध्यान दे और पानी से चलने वाले घराटों को दोबारा शुरू करवाने, उनके संरक्षण और संचालन के लिए ठोस योजनाएं लागू करे।
प्रयास सोसाइटी जल्द ही क्षेत्रीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर जनभागीदारी बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाएगी। संस्था का मानना है कि घराटों का संरक्षण न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बचाएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार और स्वस्थ जीवनशैली को भी मजबूती देगा।

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