"गवाही में खड़े होये कैसे" *Shayeri शायरी*
हम उनकी गवाही में खड़े होये तो होये कैसे? वो दुनिया के एकलौते शख्स ऐसे हैं, जो अपनी ही बेगुनाही के सच को भी झूठ मे बदल दिया करते हैं। *--असलम बाशा (A. B.)*