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बिहार में ज़मीन से जुड़े काम ठप — 40 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित।

बिहार में इन दिनों ज़मीन से जुड़े काम पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। वजह है राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की लगातार चल रही हड़ताल। इसका असर आम लोगों पर बहुत भारी पड़ रहा है — खासकर उन पर, जिन्हें तुरंत काम करवाना है।
क्या है पूरा मामला?
राज्य के 537 अंचल कार्यालयों में काम प्रभावित
करीब 1100 अधिकारी (9 मार्च से) और 3500 कर्मचारी (11 फरवरी से) हड़ताल पर
हर दिन:
5,500 म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) आवेदन लंबित
10,000 परिमार्जन आवेदन पेंडिंग
कुल 40 लाख से ज्यादा मामले अटके।
आम जनता की परेशानी
फौजी देवव्रत शर्मा की पीड़ा
शिलांग में तैनात एक सैनिक छुट्टी लेकर पटना आए, लेकिन:
ज़मीन विवाद सुलझ नहीं पा रहा
ऑफिस-ऑफिस भटकना पड़ रहा
अब 6 महीने बाद ही फिर छुट्टी मिलेगी
मनोज कुमार (जक्कनपुर)
जमीन की रसीद कटवाने आए
जवाब मिला: “हड़ताल खत्म होने के बाद आना”
अखिलेश मेहता (इस्माइलपुर)
6 महीने से परिमार्जन लंबित
आरोप: पैसे देने वालों का काम पहले
मंगलेश कुमार (सोरमपुर)
जमीन नापी के लिए कई बार चक्कर
हर बार 400–500 रुपये खर्च

जमीनी हालात
अंचल कार्यालयों में सन्नाटा
सिर्फ CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) पर आवेदन लिए जा रहे
लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही

हड़ताल की मुख्य वजह
DCLR बनाम ADLO विवाद
पहले DCLR पद राजस्व सेवा के लिए था
सरकार ने नया ADLO पद बना दिया
हाईकोर्ट ने DCLR पर पोस्टिंग का आदेश दिया
सरकार ने नियम बदलकर पद को दूसरे विभाग में डाल दिया
इससे नाराज़ होकर अधिकारी हड़ताल पर

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2800
गृह जिले में पोस्टिंग
प्रमोशन और ACP/MACP का लाभ
लैपटॉप, इंटरनेट जैसी सुविधाएं
फील्ड कार्य के लिए वाहन/ईंधन
मुफ्त इलाज और पुरानी पेंशन बहाली

सरकार का रुख
हड़ताल को अवैध बताया गया
कई अधिकारियों को निलंबित किया गया
काम पर लौटने का अल्टीमेटम
BDO और अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी
दावा: कुछ अधिकारी काम पर लौटे हैं
लेकिन हकीकत: जमीनी स्तर पर काम अभी भी ठप।

बड़ा सवाल
👉 अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो:
जमीन विवाद बढ़ेंगे
गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कम होगा।

जनता के लिए जरूरी सलाह
✔️ अभी नए आवेदन करने से पहले स्थिति जांच लें
✔️ ऑनलाइन आवेदन कर दें, ताकि लाइन में जगह बनी रहे
✔️ जरूरी मामलों में उच्च अधिकारियों या जन शिकायत पोर्टल का सहारा लें।

यह सिर्फ एक हड़ताल नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कमजोरी को दिखाता है।
जब तक सरकार और कर्मचारी मिलकर समाधान नहीं निकालते, तब तक आम जनता को ही सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी।

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