संविधान के तहत हर नागरिक को अपने घर में शांतिपूर्ण तरीके से पूजा या प्रार्थना करने का मौलिक अधिकार है।
हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने निजी निवास (घर) पर प्रार्थना सभा आयोजित करता है, तो उसके लिए जिला प्रशासन या पुलिस से किसी भी प्रकार की पूर्व अनुमति (Permission) लेने की आवश्यकता नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान आया जिसमें पुलिस द्वारा निजी घरों में चल रही प्रार्थनाओं को रोकने या उनमें हस्तक्षेप करने की शिकायतों का जिक्र था।
कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने कहा कि संविधान के तहत हर नागरिक को अपने घर में शांतिपूर्ण तरीके से पूजा या प्रार्थना करने का मौलिक अधिकार है।
पुलिस को निर्देश: कोर्ट ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे निजी कार्यक्रमों में तब तक हस्तक्षेप न करें जब तक कि वहां कोई कानून-व्यवस्था (Law and Order) की स्थिति उत्पन्न न हो रही हो या कोई अवैध गतिविधि न हो रही हो।
फैसले का प्रभाव
व्यक्तिगत स्वतंत्रता: यह फैसला नागरिकों की निजता और धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता को मजबूती देता है।
कानूनी स्पष्टता: अब पुलिस केवल 'प्रार्थना सभा' होने के आधार पर किसी के घर में दखल नहीं दे सकेगी।
विवादों पर विराम: अक्सर मोहल्लों में प्रार्थना सभाओं को लेकर होने वाले छोटे-मोटे विवादों में अब यह कानूनी आधार के रूप में काम करेगा।
ध्यान दें: हालांकि निजी प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं है, लेकिन यदि सभा में लाउडस्पीकर का उपयोग किया जा रहा है या सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना है, तो ध्वनि प्रदूषण और अन्य स्थानीय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।