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राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश को पत्र-

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा विभिन्न हाईकोर्टों में जजों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों को प्राथमिकता देने के प्रस्ताव का विरोध हो रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन जोधपुर ने प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को हाईकोर्ट व अन्य अदालतों के वकीलों की तुलना में ज्यादा गुणवान बताने की निंदा की है।

एसोसिएशन अध्यक्ष नाथूसिंह राठौड़ ने प्रस्ताव पर भी कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना को इसे अमल में नहीं लाने की मांग की है।


पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने देश के मुख्य न्यायाधीश को प्रस्ताव भेजा, जिसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों को हाईकोर्ट में जजों के पद पर नियुक्त करना चाहिए।

अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि सीजेआई इस आग्रह को कंसीडर करने के लिए राजी हो गए तथा सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को हाईकोर्ट में नियुक्ति में कंसीडर करने के संबंध में लिखित में भेज दिया है।

इसी प्रस्ताव का विरोध हो रहा है। हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसाेसिएशन के इस प्रस्ताव की भर्त्सना करने की जरूरत है, जो इस धारणा पर आधारित है कि सुप्रीम कोर्ट के वकील हाईकोर्ट के वकीलों की तुलना में ज्यादा गुणवान होते हैं। ऐसा समझना हास्यास्पद और अपमानजनक है। हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति पूरी तरह से देश के संबंधित हाईकोर्ट के कॉलेजियम के विवेकाधीन व क्षेत्राधिकार में है।

छोटे स्थान से भी आ सकती है प्रतिभा
एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि पेशेवर गुणवत्ता किसी स्थान विशेष पर जन्म लेने या वकालत करने से नहीं आती, बल्कि छोटी जगहों से भी योग्य एवं प्रतिभावान अधिवक्ता होते हैं। पत्र में राजस्थान से सुप्रीम कोर्ट एवं अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचे न्यायाधीशों का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव का विरोध किया गया है।

साथ ही मुख्य न्यायाधीश से इसे अमल में नहीं लाने और इस संबंध में किसी भी हाईकोर्ट को कोई निर्देश जारी नहीं करने का आग्रह किया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर कोई निर्देश जारी कर भी लिए गए हों, तो उन्हें तत्काल वापस लिया जाए।

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