logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

कहानी : "कायनात" : अध्याय 2: शेख जमीरुल हक खान चौधरी


अध्याय 2: छुपी हुई दुनिया का दरवाज़ा
रात अब और भी गहरी हो चुकी थी…
लेकिन आयत की आँखों में नींद नहीं, सिर्फ सवाल थे।
उसके हाथ में वही काला लिफाफा,
और सामने खुली हुई उसकी अम्मी की डायरी।
"क्या सच में… ये सब मेरे लिए है?"
उसने खुद से धीमे से पूछा।
उसने लिफाफे से निकला नक्शा फिर से खोला।
इस बार उसने ध्यान से देखा —
नक्शे के बीचों-बीच एक जगह चमक रही थी…
जैसे वो उसे बुला रही हो।
डायरी के एक पन्ने पर लिखा था:
"जहाँ नक्शा चमके, वहीं दरवाज़ा छुपा है…"
आयत का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
रहस्यमयी जगह
अगले दिन…
आयत उस जगह पहुँची, जो नक्शे में दिखाई गई थी।
वो शहर से दूर एक पुराना, सुनसान खंडहर था।
चारों तरफ सन्नाटा…
और हवा में एक अजीब-सी ठंडक।
"यहीं है वो जगह…" उसने खुद से कहा।
उसने अपनी जेब से छोटी-सी चाबी निकाली,
जो लिफाफे में मिली थी।
खंडहर के बीचों-बीच एक टूटी हुई दीवार थी,
जिस पर अजीब-से निशान बने थे —
वही निशान, जो डायरी में थे।
जैसे ही आयत ने चाबी को उस दीवार के एक छोटे-से छेद में डाला…
धड़ाम!!!
ज़मीन हल्की-सी कांपी…
और दीवार धीरे-धीरे खुलने लगी।
एक नई दुनिया
दीवार के पीछे जो था…
वो किसी ख्वाब से कम नहीं था।
एक चमकती हुई सुरंग…
नीले और सुनहरे रंग की रोशनी से भरी हुई।
आयत ने घबराते हुए एक कदम आगे बढ़ाया।
"क्या मुझे अंदर जाना चाहिए…?"
लेकिन उसी वक्त उसे अपनी अम्मी की आवाज़ याद आई —
"डर से आगे ही सच मिलता है…"
उसने आँखें बंद कीं…
और सुरंग के अंदर कदम रख दिया।
क़ायनात का पहला राज़
जैसे ही आयत अंदर गई,
उसके चारों तरफ की दुनिया बदल गई।
अब वो एक ऐसी जगह खड़ी थी,
जहाँ आसमान ज़मीन से जुड़ा हुआ था…
जहाँ पेड़ हवा में तैर रहे थे…
और जहाँ हर चीज़ जिंदा महसूस हो रही थी।
"ये… ये कौन-सी जगह है?" उसने हैरानी से कहा।
तभी पीछे से एक आवाज़ आई —
"स्वागत है… क़ायनात में।"
आयत ने पलटकर देखा…
उसके सामने एक अजनबी खड़ा था —
काली आँखें, शांत चेहरा…
लेकिन उसके अंदर एक अजीब-सी ताकत थी।
"तुम… कौन हो?" आयत ने पूछा।
वो हल्का-सा मुस्कुराया और बोला —
"मैं वो हूँ… जो तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था।
क्योंकि अब… तुम इस क़ायनात का हिस्सा हो।"

आयत अब उस दुनिया में खड़ी थी,
जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था।
लेकिन उसके मन में अब भी एक सवाल गूंज रहा था —
क्या ये अजनबी उसका साथी है…
या फिर इस क़ायनात का सबसे बड़ा खतरा?

0
0 views

Comment