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नया आयकर कानून एवं कई बजटीय प्रावधान एक अप्रैल से होंगे लागू, जानिए क्या होगा बदलाव

नई दिल्ली, 31 मार्च (हि.स)। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही एक अप्रैल से देश का आयकर ढांचा भी बड़े बदलावों के दौर में प्रवेश करने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 बुधवार से लागू हो जाएगा, जो करीब छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। इस नए कानून के तहत टैक्स सिस्टम, प्रक्रियाओं और नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव वित्तीय वर्ष और निर्धारण वर्ष की जगह एकल ‘कर वर्ष’ की शुरुआत है, जिससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की गई है।

आयकर विभाग के मुताबिक नए आयकर कानून और अन्य बजटीय प्रावधान 1 अप्रैल से लागू होंगे। इन बजटीय प्रावधान में वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) व्यापार पर उच्च प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और चिकित्सा तथा शिक्षा उद्देश्यों के लिए विदेशी पर्यटन पैकेज एवं एलआरएस प्रेषणों पर कम टीसीएस शामिल हैं। इसके अलावा भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक 20 वर्ष की कर छूट और सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए ‘सेफ हार्बर’ प्रावधानों की सीमा बढ़ाने से संबंधित बजट घोषणाएं भी वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ बुधवार से प्रभावी हो जाएंगी।

नए कानून का उद्देश्य उसी कर नीति को अधिक तार्किक, सुलभ एवं पाठक-अनुकूल प्रारूप में प्रस्तुत करना है। बदलाव अवधि के दौरान उसका ई-फाइलिंग मंच पुराने और नए दोनों आयकर कानूनों के तहत अनुपालन की सुविधा देगा। साथ ही पिछले वर्षों से संबंधित सभी आकलन, अपील एवं अन्य कार्यवाही अंतिम निपटान तक पुराने कानून के तहत ही जारी रहेंगी। आकलन वर्ष 2026-27 (जो पुराने कानून की अवधि से संबंधित है) के लिए जुलाई में रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता पुराने कानून के तहत निर्धारित प्रपत्रों का ही उपयोग करेंगे। कर वर्ष 2026-27 के लिए अग्रिम कर भुगतान जून से शुरू होगा। आयकर अधिनियम, 2025 में आकलन वर्ष और पूर्व वर्ष के अंतर को समाप्त कर एकल ‘कर वर्ष’ व्यवस्था लागू की गई है।

इसके साथ ही समय सीमा के बाद आयकर रिटर्न दाखिल होने पर भी टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) की वापसी बिना किसी दंड शुल्क के लेने की अनुमति दी गई है। एक अप्रैल से लागू होने वाला एक अन्य बड़ा बदलाव वायदा एवं विकल्प (एफएंडओ) सौदों पर एसटीटी में वृद्धि है। वायदा अनुबंधों पर एसटीटी 0.02 फीसदी से बढ़कर 0.05 फीसदी हो जाएगा। विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प के प्रयोग पर एसटीटी क्रमशः 0.1 फीसदी और 0.125 फीसदी से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो जाएगा। एसटीटी में यह बढ़ोतरी इक्विटी बाजार के एफएंडओ खंड में सट्टेबाजी को सीमित करने और छोटे निवेशकों को भारी नुकसान से बचाने के उद्देश्य से की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी डेरिवेटिव (एफएंडओ) खंड में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 2024-25 में 1.06 करोड़ थी, जो 2025-26 में (30 दिसंबर 2025 तक) घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई। सेबी के अध्ययन ‘इक्विटी डेरिवेटिव खंड में वृद्धि बनाम नकद बाजार’ के अनुसार, 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों को 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध नुकसान हुआ। इसके साथ ही आईटी सेवाओं के लिए ‘सेफ हार्बर’ सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे आईटी/आईटीईएस क्षेत्र को अधिक निश्चितता मिलेगी एवं मुकदमेबाजी में कमी आने की उम्मीद है। आईटी सेवाओं के लिए ‘सेफ हार्बर’ एक कर व्यवस्था है जो ‘‘ट्रांसफर प्राइसिंग’’ विवादों को कम करने के लिए बनाई गई है।

विदेशी यात्रा पैकेज और उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत चिकित्सा एवं शिक्षा के लिए भेजी जाने वाली राशि पर टीसीएस (स्रोत पर एकत्रित कर) में कमी का उद्देश्य मध्यम वर्ग को राहत देना है। विदेशी यात्रा पैकेज पर टीसीएस 20 फीसदी से घटाकर दो फीसदी कर दिया गया है। चिकित्सा और शिक्षा के लिए प्रेषण पर टीसीएस पांच प्रतिशत से घटाकर दो फीसदी होगा। इसके अलावा केंद्रीय बजट में घोषित 20 वर्ष की कर छूट से घरेलू डेटा सेंटर कंपनियों को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि इससे वे वैश्विक ग्राहकों को सेवाएं देते समय उनकी विदेशी आय पर भारत में कर लगने के जोखिम से बच सकेंगी।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में यह प्रावधान किया गया है कि भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली किसी भी विदेशी कंपनी को 2047 तक 20 वर्ष की कर छूट मिलेगी, जिससे उनकी वैश्विक आय पर भारतीय कर अधिकारियों द्वारा कर लगाए जाने की आशंकाएं दूर होंगी। चाहे कोई वैश्विक कंपनी भारत में अपना डेटा सेंटर स्थापित करे या किसी भारतीय डेटा सेंटर से सेवाएं ले, दोनों स्थितियों में कर व्यवस्था समान रहेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा के लिए समान अवसर सुनिश्चित होगा। भारत में प्रभावी कॉरपोरेट कर दर 25.17 फीसदी है।

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